अब खेती किसानी से बदलेंगे जीवन । अपनी मिट्टी अपना गांव अपना बागीचा अपनी छांव पर जिंदगी बितायेंगे

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लॉकडाउन की अवधि में जो भी लोग बाहर से आ रहे हैं। वे अब दुबारा बाहर नहीं जाने की बात कह रहे हैं। लॉकडाउन की अवधि में हुई दिक्कत के बाद वे लोग खेती—किसानी कर अपनी तकदीर बदलने की सोच रहे हैं। मजदूरों ने बताया कि वे लोग अब घर पर ही रहेंगे। खेती—किसानी और गो पालन से घर चलाएंगे, पर बाहर कमाने नहीं जाएंगे। वहीं कुछ ऐसे लोग लॉकडाउन की वजह से जिनकी नौकरी चली गई वे लोग अब धान की खेती में जुट ग़ए हैं।
कोरोना को लेकर बाहर से आये कई प्रवासियों ने अपना दर्द बयां किया। उनलोंगों ने कहा कि अब घर पर रह कर ही अपनी मेहनत से खेती किसानी करेंगे। लेकिन परदेश नहीं जायेंगे। अपनी मिट्टी अपना गांव अपना बागीचा अपनी छांव। इसी तर्ज पर अब गांव में ही अपनी जिंदगी बितायेंगे। इस कोरोना ने एहसास कराया है कि अपना घर अपना समाज ही सबसे बड़ा होता है। इससे बढ़ कर दुनिया में और कुछ नहीं है।


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