आखिर किसान कब बोल पाएगा – मै भी आत्मनिर्भर

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मै भी आत्मनिर्भर
पहले आप किसानो की खराब हालात के चिञ देखें

उद्योगपतियों को राहत

आरटीआई के माध्यम से एक खुलासा हुआ है कि 50 बड़ी कम्पनियों का 68,600 करोड़ बट्टे खाते में डाल दिया गया है. इसके अलावा पहले भी उद्योगपति घरानों को इसी तरह की छूट दी जाती रही है.

मार्च, 2018 में सरकार के वित्त राज्यमंत्री श्री शिव प्रताप शुक्ल ने संसद में उद्योगपति घरानों का 2.42 लाख करोड़ रु. एनपीए करने की बात स्वीकारी थी.

प्रधानमंत्री इकनोमिक एडवाइजरी कॉउन्सिल के चेयरमैन श्री बिबेक देबरॉय के मुताबिक भी 2004 के बाद से अब तक उद्योगपति घरानों को 50 लाख करोड़ रु. की टैक्स में छूट दी जा चुकी है, 2019 में यह छूट 1.45 लाख करोड़ रु. की थी.


रेटिंग एजेंसी “क्रेडिट सुइस” की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014-19 के बीच पूंजीपति घरानों के 7,77, 800 करोड़ रुपये का कर्ज एनपीए किया गया था.

किसानों को कितना हुआ घाटा

-आर्थिक सहयोग और विकास संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार सन 2000 के बाद से किसानों को उचित एम.एस.पी. नहीं मिलने के कारण 45 लाख करोड़ रु. का नुक्सान हुआ है.

2007 में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट आई थी, अगर 2007 में इस रिपोर्ट को लागू किया जाता तो हर साल किसानों को 2 लाख करोड़ रु. अधिक मिलते. 2020 तक किसानों को 28 लाख करोड़ रु.अधिक मिलने थे जो उनको नहीं मिले.

नेशनल एग्रीकल्चर एवं रुरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने 2016-17 ने 40.327 ग्रामीण घरों पर एक सर्वे कर रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में 52% किसानों के ऊपर औसत 1 लाख रु. का कर्ज है. वहीं देश में कुल 14 करोड़ किसान परिवार हैं, और उन पर 2018 तक किसानों पर कुल उधार महज 7 लाख करोड़ रु. है.

कृषि एवम अन्य सहयोगी क्षेत्र 70% जनता को रोजगार मुहैया कराते हैं और कॉर्पोरेट क्षेत्र मात्र 2.3% जनता को. एक रिपोर्ट के अनुसार सन 2018 में बैंकों द्वारा कृषि क्षेत्र को 10 लाख करोड़ का कुल क्रेडिट दिया गया था और पूंजीपति घरानों को 22 लाख करोड़ का कुल क्रेडिट दिया गया था. जब भी किसानों को कर्जमुक्त करने की बात आती है तो हमेशा वित्तीय संकट का हवाला दिया जाता है लेकिन उद्योगपतियों के कर्ज माफ करते समय वित्तीय संकट का तर्क नहीं दिया जाता है.

2014 लोकसभा चुनाव से पहले भाजापा ने स्वामीनाथन आयोग के अनुसार किसानों को C2+50% फॉर्मूले के हिसाब से किसानों को समर्थन मूल्य देने का वादा किया था जो अब तक अधूरा है


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