क्या है e NAM स्कीम, जिसका फायदा लेने के लिए जुड़े 1.67 करोड़ किसान | What is e-NAM scheme, 1.67 crore farmers involved to take advantage

Spread the love
  • 862
    Shares

e NAM स्कीम

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही हैं. किसानों को ध्यान में रखते हुए ही मोदी सरकार (Government of India) ने नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यानी ई-नाम स्कीम (e-Nam Mandi) की शुरुआत की है.

खेती-किसानी एवं कृषि उत्पादों के कारोबार से जुड़े 1.68 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही हैं. किसानों को ध्यान में रखते हुए ही मोदी सरकार (Government of India) ने नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यानी ई-नाम स्कीम (e-Nam Mandi) की शुरुआत की है.

खेती-किसानी एवं कृषि उत्पादों के कारोबार से जुड़े 1.68 करोड़ लोग इस स्कीम में रजिस्टर्ड हो चुके हैं.  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक इससे स्कीम से 1,65,73,893 तो किसान जुड़े हैं.

Also Read this

पशुओं में फास्फोरस की कमी को कैसे पहचाने

मंत्रालय के मुताबिक स्कीम से 1,26,556 ट्रेडर और 70,655 कमीशन एजेंट भी रजिस्टर्ड हुए हैं. अगर आप किसान हैं तो देर किस बात की. आपको नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट के जरिए कृषि उत्‍पादों का अधिक दाम मिलेगा और आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी.

आपको बता दें कि साल 2017 तक ई-मंडी से सिर्फ 17 हजार किसान ही जुड़े थे. ई-नाम एक इलेक्ट्रॉनिक कृषि पोर्टल है. जो पूरे भारत में मौजूद एग्री प्रोडक्ट मार्केटिंग कमेटी को एक नेटवर्क में जोड़ने का काम करती है.

इसका मकसद एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बाजार उपलब्ध करवाना है. इससे फायदे को देखते हुए किसान तेजी से इसके साथ जुड़ रहे हैं. देश के 18 राज्यों में इसका संचालन हो रहा है.

इंटरनेट से जोड़ी गई हैं देश की 585 मंडियां-ई-नाम के तहत देश के विभिन्‍न राज्‍यों में स्थित कृषि उपज मंडी को इंटरनेट के जरिए जोड़ा गया है. इसका टारगेट यह है कि पूरा देश एक मंडी क्षेत्र बने.

अगर गोरखपुर का कोई किसान अपनी उपज बिहार में बेचना चाहता है तो कृषि उपज को लाने-ले जाने और मार्केटिंग करना आसान हो गया है.

 मतलब साफ है कि किसान और खरीदार के बीच से ई-नाम ने दलाल खत्म कर दिए हैं. इसका लाभ न सिर्फ किसानों बल्कि ग्राहकों को भी मिलेगा.

किसान और व्यापारियों के बीच के इस कारोबार में स्‍थानीय कृषि उपज मण्‍डी के हित को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, क्‍योंकि पूरा व्‍यापार उसके माध्‍यम से ही होगा.

किसान को इस टेंशन से मिल रही है छुट्टी- बाजार और उत्पाद का अच्छा दाम मिलना किसानों की सबसे बड़ी समस्या है. किसान बड़ी हसरत से अपने खेत में बुआई करता है, फसल तैयार करता है, महीनों बाद जब फसल तैयार हो जाती है तो उसे बाजार का संकट होने लगता है. वह फसल काट कर मंडी ले जाता है, और वहां जब उसका औना–पौना दाम लगता है तो वो परेशान हो उठता है.

क्या है e-Nam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के इस सबसे बड़े दर्द समझा और फसलों की ऑनलाइन बिकवाली के लिए देश भर में कृषि बाजार (ई-मंडी) खोल दी. इसका मतलब है राष्ट्रीय कृषि बाजार.

>> इसकी शुरुआत 14 अप्रैल, 2016 को की गई थी. इसके तहत रजिस्टर्ड होकर किसान अपनी उपज अच्छी कीमत पर कहीं भी बेच सकते हैं.

>> अब वे बिचौलियों और आढ़तियों पर निर्भर नहीं हैं. सरकार ने अब तक देश की 585 मंडियों को ई-नाम के तहत जोड़ा है.

>> केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत काम करने वाला ‘लघु कृषक कृषि व्यापार संघ’ (एसएफएसी) ई-नाम को लागू करने वाली सबसे बड़ी संस्था है. सरकार की योजना इस साल 200 एवं अगले साल 215 और मंडियों को इससे जोड़ने की है.

>> देशभर में करीब 2,700 कृषि उपज मंडियां और 4,000 उप-बाजार हैं. पहले कृषि उपज मंडी समितियों के भीतर या एक ही राज्य की दो मंडियो में कारोबार होता था. हाल ही में पहली बार दो राज्यों की अलग-अलग मंडियो के बीच ई-नाम से व्यापार किया गया.

ई-नाम के साथ जुड़ने का तरीका-  सबसे पहले आपको सरकार की ओर से जारी की गई वेबसाइट www.enam.gov.in पर जाना  होगा.

>> इसके बाद रजिस्ट्रेशन टाइप करना होगा. वहां किसान (Farmer) का एक ऑप्शन दिखाई देगा.

>> फिर आपको अपनी ई-मेल आईडी देना होगी. इसमें आपको ई-मेल के जरिए लोगिन आईडी ओर पासवर्ड का मेल आएगा.

>> इसके बाद आपको टैंपरेरी ई-मेल आईडी और पासवर्ड भेजा जाएगा. फिर आप www.enam.gov.in की वेबसाइट पर लॉगिन कर डैशबोर्ड पर आप अपने KYC डॉक्युमेंट से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.

जैसे ही APMC आपके KYC को अप्रूव करेगा. वैसे ही आप अपना कारोबार शुरू कर पाएंगे.

अधिक जानकारी के लिए आप https://enam.gov.in/web/resources/registration-guideline पर जानकर जानकारी ले सकते हैं.


Spread the love
  • 862
    Shares

One Comment

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *