जब किसानो की ललकार से हिल जाती थी संसद | When the government were shaken by the challenge of farmers


साल 2011, तारीख 15 मई। जब बार-बार आसमान से हेलीकॉप्टर के आने-जाने की आवाज सुनाई देने लगी तो चौपाल मे बैठे एक बाबा बोल उठे,
दिखे जा लिया टिकैत

यह सुनते ही चारो तरफ शांति और मेरे रोंगटे खडे हो गए। उस दिन पश्चिमी उत्तरप्रदेश का किसान तो मानो अनाथ सा हो गया, उसकी आवाज चली गई।
आज उनकी पुण्यतिथि है।

महेन्द्र सिंह टिकैत। जिसकी अगुवाई में किसानों की रंगों में हक मांगने और अपनी पहचान देश में बनाने का जज्बा जग जाता था। सरकारें किसानों के आंदोलन की घोषणा सुनने के बाद यह पूछती थी इनका नेता कौन है। जवाब में टिकैत का नाम सुनकर मांगें जल्दी जल्दी पूरा करने की कोशिश करतीं थी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों के एक बड़े नेता थे महेन्द्र सिंह टिकैत। भारतीय किसान यूनियन जो किसानों के बारे में सोचती थी, उनका हक दिलाने के लिए लड़ती थी, महेन्द्र सिंह टिकैत के पास उसकी बागडोर एक लम्बे समय तक थी।
महेन्द्र सिंह टिकैत उत्तर प्रदेश के किसान नेता तथा भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे। टिकैत वर्षों सिर्फ किसानों की समस्याओं के लिए संघर्षरत थे और विशेष कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के जाट किसानों में उनकी भारी साख थी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक जिला जो गन्ने, गुड़ व चीनी के लिए मशहूर है मुजफ्फरनगर, उसके सिसौली गाँव में चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत का (1935 वर्ष) जन्म हुआ था। आप सोच रहे होंगे कि अचानक चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत चर्चा में क्यों आ गए तो हम आपको बताते हैं, आज उनका निधन (15 मई 2011) हुआ था। पर उस नेता को आज कोई याद नहीं कर रहा है। जबकि कई लोग उनके बनाए आंदोलन से आज भी पैसा और नाम कमा रहे हैं।
चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत ने दिसंबर 1986 में ट्यूबवेल की बिजली दरों को बढ़ाने के ख़िलाफ़ मुज़फ्फरनगर के शामली से एक बड़ा आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन जारी था, एक मार्च 1987 को किसानों के प्रदर्शन में पुलिस ने गोलीबारी कर दी, जिसमें दो किसान मारे गए। दोनों युवा किसानों का के शव को पुलिस उठा नही सकी। और जब टिकैत इन दोनों युवाओं का अस्थिकलश शुक्रताल में प्रवाहित करने गए तो इतने लोग ट्रैक्टर ट्राली, गाड़ियों और बाइकों के साथ थे कि एक सिरा शुक्रताल और दूसरा मुजफ्फरनगर को छू रहा था।
आपको एक घटना के बारे में बताते हैं वर्ष 1993 में भारतीय किसान यूनियन का वोट क्लब पर आंदोलन था। आंदोलन के नेता टिकैत के नेतृत्व में हजारों किसान वोट क्लब पर एकत्रित हुए। किसानों ने वहां कई दिनों तक डेरा डाला। किसान अपने साथ सैकड़ों पशुओं को भी ले आए थे। सभी किसान हुक्का पीते और विरोध करने की नई योजना बनाते आखिरकार तंग हार कर सरकार ने बाबा टिकैत को मांगें पूरा करने का आश्वासन दिया। बाबा टिकैत सरकार की बात मान धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया।
इस घटना के बाद चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। और कोई उन्हें बाबा, कोई महात्मा तो कोई चौधरी के नाम अपना समझकर प्यार से पुकारता था। टिकैत पूरे देश में घूम घूमकर किसानों के लिए काम किया। अपने आंदोलन को राजनीति से बिल्कुल अलग रखा।

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