पुराने जमाने में लोग एसे करते थे खेती


जानिए कैसी होती थी हड़प्पा कालीन समय में खेती
भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि की एक अहम भूमिका हमेशा से रही है। यहां इंसान पिछले 5000 वर्ष से खेती कर रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि खेती करने के तरीके अभी भी उसी तरीके से है जैसे कि हरप्पन काल में थे।
सिंधू  घाटी सभ्यता का ज्यादातर क्षेत्र पाकिस्तान के सिंध, पंजाब प्रांत और बलूचिस्तान तक फैला था वहीं भारत के पंजाब, राजस्थान, हरियाणा व गुजरात तक फैला था।
पुरातत्व विभाग ने खुदाई के बाद यही जाना कि हड़प्पा कालीन सभ्यता की मुख्य अर्थव्यवस्था कृषि पर ही निर्भर थी ।


फसलें-
इस सभ्यता की मुख्य फसलें गेहूं ,जौ व बाजरा हुआ करती थी। ये फसले हर जगह मिली है। इसके अलावा धान के प्रमाण केवल लोथल(गुजरात) वह सिंधु नदी के किनारे ही मिले हैं। पुरात्वीदो के अनुसार चावल केवल पालतू जानवरों को खिलाने के ही काम में ले जाते थे।
इस क्षेत्र में कपास भी खूब होता था जो कि निर्यात किया जाता था।
थोड़े प्रमाण दाल व सरसों के भी मिले हैं।


My Store सिंचाई-
ज्यादातर कृषि केवल नदियों के आसपास ही होती थी। कुछ के केवल मानसून पर निर्भर होते थे।
सबसे अद्भुत चीज जो थी वह यह कि उस वक्त छोटे-छोटे बांध वह छोटी  नहर भी काम में ली जाती थी।
इसके अलावा मोहनजोदड़ो जो सिंधु नदी के किनारे हैं वहां पर एक सिंचाई प्रणाली भी देखने को मिली है।
मार्गला की पहाडियो मे टेरेस फार्मिंग भी देखने को मिली है।


औजार व तरीके-
मोहनजोदड़ो की सील में एक बैल के साथ एक हल भी चित्रित है इससे पता चलता है कि खेत जोतने के लिए उस वक्त भी बैल का इस्तेमाल होता था।
हल के आकार के मिट्टी के बने खिलौने चोलिस्तान(पाक) व बनावली(हरियाणा) में मिले हैं।
दराती जो की फसल काटने के काम आती है बलूचिस्तान में मिली है। कालीबंगा(राजस्थान) मे  मिश्रित कृषि के भी प्रमाण मिले हैं।

 भण्डारण-
मोहनजोदरो व हड़प्पा में अनाज भंडारण की व्यवस्था मिली है।

अनाज उगाने से लेकर भंडारण तक की पूरी व्यवस्था आज की आधुनिकता को भी मात देती है। धन्य है हमारे किसान भाई जो संस्कृति को संजोए हुए हैं ।।
-रजत वत्स

यह लेख हमारे सहयोगी रजत वत्स ने भेजा है । आप भी हमें अपने लिखे लेख भेज सकते हैं ।
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