खेती के लिए छोडी 40 हजार की नौकरी ,अब कमाई 50 लाख सालाना

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हरियाणा में फतेहाबाद जिले के बैजलपुर गांव के राकेश सिहाग ने खेती के लिए छोडी 40 हजार की नौकरी

अक्सर ज्यादातर किसान अपने बेटे से कहते हैं बेटा नौकरी कर लेना खेती में कुछ नहीं रखा है। लेकिन राकेश सिहाग नें इस बात को गलत साबित कर दिया है। राकेश ने ₹40000 महीने की नौकरी छोड़कर खेती शुरू कर दी हालांकि किसान अपनी जगह गलत नहीं है क्योंकि खेती में लागत बढ़ने के कारण आमदनी काफी कम हो गई है परंतु राकेश सिहाग अपनी 9 एकड़ जमीन में सालाना ₹40 से ₹50 लाख कमा रहे हैं । हालांकि यह बात अविश्वसनीय लग सकती है लेकिन यह सत्य है आखिर राकेश ने खेती को लाभकारी कैसे बनाया यह पूरी कहानी हम आपको इस लेख में बताएंगे। इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर देखें

कौन है राकेश सिहाग जिन्होने खेती के लिए छोडी नौकरी

राकेश सिहाग

हरियाणा में फतेहाबाद जिले के बैजलपुर गांव के राकेश सिहाग 5 साल पहले जूनियर सिविल इंजीनियर के तौर पर ₹40000 महीने की नौकरी करते थे। लेकिन फिर इन्होंने खेती करने के लिए नौकरी छोड़ दी और परंपरागत तरीके से खेती करने लगे लेकिन इसमें ज्यादा फायदा नहीं हुआ क्योंकि पैसे खर्च ज्यादा होने के कारण बचत कम होती थी फिर करीब 2 साल पहले इन्हें डॉ रामकुमार खरीदने नें जीरो बजट प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी । बस फिर क्या था खेती में खर्च घटता गया और कमाई बढ़ती गई ।

राकेश सिहाग आगे बताते हैं ” मैं गांव बैजलपुर का रहने वाला हूं और पिछले लगभग 5 सालों से केमिकल खेती करता था ,पहले हम बागवानी या सब्जी जो भी करते थे उसमें खर्चा बहुत ज्यादा होता था और बचत बहुत कम।अब पीछले डेढ साल से डाक्टर साहब की सलाह के बाद नेचुरल खेती स्टार्ट की।सबसे पहले हमने जीवामृत वेस्ट डी कंपोजर घन जीवामृत जैसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल स्टार्ट किया। जिससे हमारी उपज में तो कोई फर्क नहीं आया पर खेती की लागत कम हो गया। जीवामृत के लिए कुछ भी सामान बाहर से नहीं खरीदा बल्कि घर में ही उपलब्द सामान से इसे तैयार किया। जीवामृत और वेस्ट डी कंपोजर से हमारी फसल की बढ़वार में कोई भी कमी नहीं आई बल्कि सब्जी और फल के स्वाद में फर्क आया ।और बाजार में हमारे फल व सब्जियों की मांग बढ़ी है ।

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लस्सी से हमने फंगीसाइड बनाया। नीम करेला यह सब लेके हमने क्या कीटनाशक दवाई बनाई । जोकि पूर्णरूप से जैविक है। इसके फायदे को देखते हुए जो 1 एकड़ से स्टार्ट की थी वह हमने अब बढ़ाकर 9 एकड़ में कर दिए । हम बाग में सब्जी का काम करते हैं इसके अलावा मल्टी लेयर कटिंग करते हैं जिसमें 2 एकड़ में हमने बांस लगाकर सब्जी लगाते हैं।वह पूर्ण रुप से हम प्राकृतिक तरीके से करते हैं इसमें हम कोई भी खाद या कहें कि सपरे कुछ भी नहीं डालते हैं। “

प्राकृतिक खेती से पैदा फल व सब्जी व फलों की मार्केट में डिमांड बढ़ी है जिससे फलों व सब्जियों का रेट जो है मार्केट से ज्यादा मिलता है । कई बार तो मार्केट से दुगना प्राइस मिलता है ।

बागवानी फसलों सब्जियों के साथ-साथ राकेश सिहाग ने अमरुद आडोर आलू बुखारे की भी पौध तैयार की है इस पोध को बेचकर राकेश को लाखों रूपए की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी राकेश नौकरी से जहां सालाना करीब ₹500000 ही कमा पाते थे वहीं यह अब अपने खेतों से ₹5000000 से भी ज्यादा की कमाई कर रहे हैं ।राकेश की सफलता से हम यही कह सकते हैं कि जिनके पास खेती के लिए जमीन है वह नौकरी के पीछे ना दौड़े बल्कि प्राकृतिक तरीके से खेती करें।

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