ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे करे

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ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे करे cultivation of dragon fruit

हमारे देश में आम तौर पर उगाई जाने वाली फसलें किसानों के लिए बहुत ज्यादा मुनाफा नहीं दे पा रही है। ऐसे में उनकी आमदन बढ़ाने की नई-नई फसलें लाई जा रही है ऐसी ही एक फसल है ड्रैगन फ्रूट। भारत में इसकी शुरुआत हाल के वर्षों में ही हुई है और अब यह लोकप्रियता हासिल करती जा रही है। ड्रैगन फ्रूट को पिटाया भी कहा जाता है । इसमें विटामिन सी, विटामिन बी, विटामिन टू आयरन और कैल्शियम पाया जाता है। इसका इस्तेमाल आइस क्रीम, फ्रूट सलाद और मिल्क शेक बनाने में भी किया जाता है। देखने में यह बहुत ही लुभावना और आकर्षक होता है और खाने में भी इसके स्वाद का कोई मुकाबला नहीं है

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ड्रैगन फ्रूट के बारे में जानकारी (परिचय )

ड्रैगन फ्रूट की शुरुआत मध्य अमेरिका से हुई उसके बाद यह वियतनाम मलेशिया थाईलैंड और श्रीलंका होता हुआ भारत पहुंचा। ड्रैगन फ्रूट की खेती भारत के कई राज्यों में की जाती है। जैसे कि महाराष्ट्र गुजरात आंध्र प्रदेश कर्नाटक और तमिलनाडु। हमारे देश में ड्रैगन फ्रूट की खेती मुख्यत समुद्री इलाकों में की जाती है।

जिसकी मुख्य वजह इसकी अच्छी कीमत का मिलना और कम वर्षा वाले स्थान पर अच्छी पैदावार का होना है!

ड्रैगन फ्रूट के पोधो को बहुत सारे लोग अपने घर में fashion की तरह गमले में भी लगाते है!इसके फ्रूट से आइसक्रीम jelly, jem ,juice ,के साथ साथ beauty क्रीम के तोर पर इस्तेमाल किया जाता है!

ड्रैगन फ्रूट स्वस्थ के लिए भी काफी लाभदायक माना जाता है। इस फल में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा कई ज्यादा पायी जाती है। जो कई सारे रोगों से लड़ने में सहायता करता है। इस फल के सेवन से मधुमेह नियंत्रित होती है। शरीर में बड़े हुए कोलेस्ट्रॉल को कम करता है । Heart related बीमारियों में भी काफी लाभदायक रहता है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

इसके पौधे मौसमी परिवर्तन यानि तापमान का उतार चढ़ाव को आसानी से सहन कर सकते है। 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए उपयुक्त रहता है। ध्यान रखें किसकी खेती के लिए 30 से ज्यादा का तापमान उपयुक्त नहीं है । इसके पोधो को ज्यादा धुप वाली उँची जगह पर नही लगाना चाहिए। इसकी खेती 50% वार्षिक औसत बरसात होने वाली जगह पर आसानी से की जा सकती है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

वैसे तो इसकी खेती के लिए कोई विशेष प्रकार की मिट्टी की आवश्यकता नही होती है। लेकिन बलुई दोमट मिट्टी सबसे ज्यादा उपयुक्त है । आप कम उपजाऊ मिट्टी में भी इसे लगा सकते है। लेकिन व्यावसायिक रूप से आप खेती करना चाहते है तो 5.4 ph मान से 7 ph मान वाली मिट्टी में इसे लगाये।

केसे करे ड्रैगन फ्रूट की खेती की तैयारी

खेत की तैयारी के लिए पहले खेत को 2 या 3 बार गहरी जूताई कर ले। ताकि उसमे सभी प्रकार के खरपतवार नष्ट हो जाये ।उसके बाद खेत में गोबर वाली खाद्य वर्मी कम्पोस खाद् खेत की मिट्टी में मिलाये एवं उचित जल निकास की व्यवस्था रखे।

ड्रैगन फ्रूट के पौधे केसे तैयार करे

इसके पौधे तैयार करने के लिए दो तरीके है एक बीज के द्वारा और दूसरा अन्य पौधे की शाखा द्वारा । बीज से पौधे तैयार करने में काफी ज्यादा समय लगता है। इसलिए अधिकतर किसान शाखा विधि का ही उपयोग करते है । जो की व्यावसायिक खेती के लिए उत्तम होता है।शाखा के जरिये पौधे तैयार करने में स्वस्थ पौधे की छंटाई कर उसकी शाखाओं को 20 सेमी लम्बे टुकड़े का उपयोग करना चाहिए। अलग की गयी शाखाओं को रोपने से पहले छाँव में ही रखनी चाहिए।

ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाने का तरीका

इसके कमल पोधों को लगाने के लिए एक कतार में 2 मीटर की दूरी छोड़ कर 60 सेमी चोडा और 60 सेमी गहरा गड्डा खोदा जाना चाहिए। फिर कलम वाले पोधों को सूखे गोबर और बालू रेत को 1:1 :2 के अनुपात में मिला कर गड्डे में रोपे।

गड्डो में मिट्टी के साथ प्रति गड्डे में 100 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और कम्पोस्ट मिला कर भर दे । इस तरह एक एकड़ ज़मीन में 1700 पौधे लग जायेंगे । ड्रैगन फ्रूट के पौधे काफी तेजी के साथ विकसित होते है । उन्हें सहारा देने के लिए सीमेंट का पोल और तख्त लगाना चाहिए ।

ड्रेगन फ्रूट की सिचाई

अन्य फसल की तुलना में ड्रैगन फ्रूट को काफी कम पानी की आवश्यकता होती है। रोपाई के तुरंत बाद पानी दे । फिर एक सप्ताह उपरांत सिचाई करे । गर्मी के दिनों में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करे। ड्रैगन की सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई बेस्ट रहती है।

खाद् और उर्वरक

इसके पोधों के विकास में जीवाश्म तत्व मुख्य रूप से सहायक होते है।इसलिए प्रति पौधे 10 से 15 किलो तक को जैविक उर्वरक कम्पोस्ट देना चाहिए।जैविक खाद् की मात्रा प्रति दो वर्ष में बढ़ाते रहना चाहिए।

पौधे के समुचित विकास के लिए समय समय पर रासायनिक खाद् भी देना चाहिये ।जिसमे पोटाश + सुपर फास्फेट +यूरिया को 40:90:70 ग्राम प्रति पौधा देना चाहिए ।जब पोधों में फल लगना शुरू हो जाये तब नाइट्रोजन की मात्रा कम कर के पोटाश की मात्रा बड़ा देनी चाहिए।

जिससे अधिक उपज प्राप्त हो सके ।फूल आने से पहले और फल आने के समय प्रति पौधे में 50 ग्राम यूरिया 50 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 100 ग्राम पोटाश देना चाहिए। प्रति वर्ष प्रति पोधे में 220 ग्राम रासायनिक खाद् की मात्रा बड़ाई जानी चाहिए ।अधिकतम मात्रा 1.5 किलो तक हो सकती है।

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ड्रैगन फ्रूट के बारे में और अधिक

इस के पोधों में अभी तक किसी भी तरह के किट और बीमारी नही आयी है।

ड्रैगन फ्रूट के पौधे एक साल में ही फल देने के लायक हो जाते है। मई जून महीने में फूल लगते है और अगस्त से दिसम्बर तक फल आ जाते है।

प्रति एकड़ 5 से 6 टन उत्पादन होता है।

इसका बाजार में भाव प्रति किलो 200 से 250 तक रहता है।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अधिक मांग।

ड्रैगन फ्रूट की खेती में लाभ और उपज का गणित

ड्रैगन फ्रूट एक सीज़न में 3 से 4 बार फल देता है। प्रति फल का वजन लगभग 300 से 800 ग्राम तक होता है। एक पोल पर 40 से 100 फल तक लगते है। जिनका अनुमानित वजन 15 से 25 किलो प्रति पोल ।एक एकड़ में अनुमानित 300 पोल ।प्रति पोल पर फलो का कम से कम वजन 15 किलो मान लेते है ।तो वजन 4500 और बाजार भाव कम से कम 125 रूपये प्रति किलो माने तो भी प्रति एकड़ अनुमानित 5,62,500 की आमदनी होती है।

ड्रैगन फ्रूट के पौधे कहा से ख़रीदे

ड्रैगन फ्रूट के पौधे के लिए आपको किसी अच्छी नर्सरी से सम्पर्क करना पड़ेगा ।

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