कैसे करें तुलसी की खेती – Farming of tulsi

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कैसे करें तुलसी की खेती – Farming of tulsi

तुलसी का क्या महत्व है यह सब जानते हैं। इसकी जड़, तना ,पत्ती या फूल बीज सब उपयोगी हैं ।नख से शिख तक शरीर में किसी भी प्रकार का रोग हो तो तुलसी से उपचार किया जाता है । शायद इसीलिए हर भारतीय घर में तुलसी लगाने की परंपरा सालों से चली आ रही है। बहुत सी कंपनियां हैं जो तुलसी से औषधियां बनाती हैं। तेल या माला बनाती हैं ।ऐसी कंपनियां किसानों से अच्छे दामों पर तुलसी के उत्पाद खरीदते हैं तो किसान तुलसी की खेती करें।
तो आइए सबसे पहले जानते हैं कि तुलसी की खेती के लिए जलवायु किस तरह की होनी चाहिए ।

तुलसी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु – Farming of tulsi

इसकी खेती के लिए उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु उपयुक्त हैं। जहां वर्षा सामान्य या सामान्य से थोड़ी ज्यादा होती हो वह उपयुक्त होती है।

Farming of tulsi तुलसी की खेती के लिए जरूरी मिट्टी

अगर बात करें इसके लिए भूमि की तो तुलसी की विशेषता यही है कि यह हर तरह की मिट्टी में आसानी से उग जाती है। लेकिन अच्छी उपज के लिए मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 8 होना चाहिए। ध्यान रखें कि इसके लिए ऐसे खेत का चुनाव करें जहां पर जलभराव ना होता हो।

Farming of tulsi तुलसी की खेती किसान की जुबानी

“मेरी जमीन बिल्कुल बंजर जमीन है। इसमें कंकर पत्थर की भरमार है। कोई पानी की व्यवस्था नहीं है। तुलसी के ऊपर कोई भी जंगली जानवर नीलगाय वगैरह कोई अटैक नहीं करती है ।आज जो पालतू पशु है गाय है वो भी इसका कोई नुकसान नहीं करती है।”

भारत में पाई जाने वाली तुलसी के प्रकार

भारत में पांच प्रकार की तुलसी पाई जाती है ।
1.श्यामा तुलसी

2.रामा तुलसी

3.श्वेत या विष्णु तुलसी

4.वन तुलसी

5.नींबू तुलसी

इसके अलावा तुलसी की विभिन्न प्रजातियां हैं ।जैसे

  1. आसीमम सैक्टम (Ocimum Sectum )
  2. आसीमम किलिमण्डचेरिकम ( Ocimum Kilimandscharicum )
  3. आसीमम अमेरिकन गम्भीरा
    (Ocimum American Gambhira )
  4. आसीमम वेसिलिकम मुन्जरिका ( Ocimum Vacilicum )
  5. आसीमम वेसिलिकम मिनिमम
    (Ocimum Vacilium minimum )
  6. आसीमम ग्रेटिसिकम ( Ocimum Gratisikum )
  7. आसीमम विरिडी
    ( Ocimum Viridi )

सभी तुलसियों की विशेषताएं अलग-अलग है, स्वाद और खुशबू भी अलग है ।लेकिन सबसे ज्यादा जो फायदेमंद मानी जाती है वह है रामा और श्यामा तुलसी।

तुलसी की बुआई

सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई कर लें । जुताई के बाद क्यारियां बना लें।
अब क्युकि इसके बीज बहुत छोटे होते हैं व हल्के होते हैं ।
तो इन्हे डायरेक्ट एेसे ही ना बिखेर दें । बल्कि इसमें राख या रेत में मिलाकर बीज को बोंए।

Farming of tulsi तुलसी की खेती किस मौसम में करें।

बुवाई के छह से 8 सप्ताह बाद या फिर 6 से 10 सेंटीमीटर जब पौध लंबी हो जाए तो इसकी रोपाई कर देनी चाहिए । पहाड़ी क्षेत्रों में जुलाई अगस्त के महीने में इस की पौध की रोपाई की जाती है और मैदानी क्षेत्रों में अक्टूबर-नवंबर में इसकी पौध रोपी जाती है।

पौधे से पौधे की दुरी

लगाते समय ध्यान रखें कि पौध से पौध की दूरी और लाइन से लाइन की दूरी 40 सेंटीमीटर हो।

रोपाई के तुरंत बाद खेत की सिंचाई करदें।

Farming of tulsi – तुलसी की खेती में खाद

बात अगर खाद और उर्वरक की करें तो अच्छी पैदावार के लिए गोबर की खाद या कंपोस्ट दे सकते हैं। लेकिन रासायनिक खाद देने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि रसायनिक खाद के इस्तेमाल से अक्सर तुलसी का ताना जो है वह गल जाता है। और इसके औषधीय गुण भी प्रभावित होते हैं ।

वैसे तुलसी क्या कोई भी औषधीय पौधा लगाते हैं तो उसमें रासायनिक खाद का इस्तेमाल ना करें तो बेहतर होगा।

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कितने दिन में तैयार होती है तुलसी

रोपाई के 90 से 95 दिन के बाद इसकी पत्तियां तोड़ने लायक हो जाती हैं। और आपको बता दें कि आप चाहे तुलसी का कोई भी भाग बेचे ।सबमें मुनाफा होगा

तुलसी को सुखाना चाहते हैं तो इसे छायादार व हवादार स्थान पर ही सुखाएं। इसकी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की जा सकती है ।

तुलसी का बाजार

आप चाहे तो इस फसल को डाइरैक्ट मार्केट में या मंडी में बेच सकते है और लाभ कमा सकते है. इसके अतिरिक्त आप सीधे किसी कंपनी के लिए भी फ़ार्मिंग कर उन्हे अपना माल सप्लाइ कर सकते है. अगर आप इस विकल्प का चयन करते है तो आपको मार्केट तक जाकर बाजार में अपनी फसल बेचने की कोई आवश्यकता नहीं होती बल्कि कंपनी आपके खेतो में आकर आपकी फसल खुद लेती है और आपको उसका उचित मूल्य प्रदान करती है.

आप भारत में पतंजलि और अन्य आयुर्वेदिक संस्थानों द्वारा जुड़कर एसी खेती कर सकते है और लाभ कमा सकते है.

इसकी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की जा सकती है । इसके बीज मंडियों में बेचे जा सकते हैं और बहुत सी जगह ऐसी है जहां पर तुलसी की माला बनाई जाती हैं ।तो इसकी लकड़ियों को वहां पर बेचा जा सकता है। हां एक बात आपको जरूर बता दें कि तुलसी चाहे आप घर में लगाएं या खेत में लेकिन हमेशा स्वस्थ बने रहने के लिए इसका नियमित रूप से सेवन जरूर करें।

How To Register For Farming of tulsi तुलसी की खेती ?

tulsi ki kheti ka registration kaise kare

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https://patanjaliayurved.org/contract-herbal-farming.html

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