कैसे बनाया जाता है तैरता बगीचा और कैसे करे तैरते बगीचे में खेती

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तैरती सब्जियों का बगीचा

तैरता बगीचा

सब्जियों को उगाने के लिए पानी की जरूरत होती है ।पर दुनिया के कई हिस्सों में जमीन पर लंबे समय तक बाढ़ का पानी रहता है। बांग्लादेश के कुछ अभिनव किसानों ने एक अनोखा हल निकाला है ।
किसान सड रहे पौधों की जडो का चबूतरा या पाठ बनाते हैं जो कंपोस्ट का काम करते हैं। जोकि नदियों और पानी के मौसमी स्रोतों पर तैर सकती है । जिससे पानी के ऊपर फसल उगाई जा सकती है।

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इस लेख में हम जलकुंभी से तैरता बगीचा बनाना सीखेंगे। सबसे पहले इसके फायदे जान लेते हैं ।

किसान की जुबानी

हमारी जमीन पानी में डूबी रहती है तो हमारे पूर्वज जीने के लिए पहले से फसल उगाने के तरीके सोचने लगे थे ।फसल के अवशेष से उन्होंने तैरते बगीचे के बारे में सोचा । हमें रसायनिक उर्वरकों या बहुत संरक्षण दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि तैरता बगीचा खुद उपजाऊ होता है ।

यह बड़ी अच्छी बात है कि किसान बिना किसी रसायन की ज्यादा और बेहतरीन क्वालिटी की फसल काट पाते हैं।

तैरता बगीचा बनाने के लिए जरूरी सामान व परिस्थिती

बगीचा बनाने से पहले एक ऐसी जगह चुनिए जहां बरसात के मौसम में जलकुंभी खूब हो । जहां कहीं भी पानी 1 मीटर से गहरा रहे वहां आप तैरता बगीचा बना सकते हैं। क्योंकि चबूतरे का 1 मीटर मोटा होना जरूरी है। तैरता बगीचा ऐसी जगह हो जहां वह किसी नाव के रास्ते में ना आए । जलकुंभी पास खींचने में आपको एक नाव , लंबा बांस और कांटा लगी एक लकड़ी चाहिए होगी । आप नाव को वहां ले जाइए जहां आपको तैरता बगीचा बनाना है।

तैरता बगीचा बनाने का तरीका

लंबे बांस को जलकुंभी पर रखिए। चाहे तो कोई ओर मजबूत और हलका लकड़ा भी ले सकते हैं । बांस के दोनों तरफ से जलकुंभी को बांस की ओर खींच लें।
और पौधों को उन पर खड़े होकर अपने पैरों से दबा दें ।ताकि एक ठोस चबुतरा बन जाए। जलकुंभी के पत्तों को बीच में ले लिजिए और जड ऊपर की ओर होनी चाहिए। इससे पत्ते जल्दी सडेंगे और एक साथ जुड़े रहेंगे। जब तक यह आपका वजन झेलने लायक न हो जाए और पैर गिले हुए बिना आप चल ना सकें।तब तक जलकुंभी की नई परतें लगाते रहे। ध्यान रहे पाठ उलट ना जाए ।

अब पाठ के तले से बांस निकालना है ताकि उसे फिर से इस्तेमाल किया जा सके।

जलकुंभी को स्थिर होकर सिकुडने के लिए छोड देना है।

7 से 10 दिनों बाद पाठ पर जलकुंभी का एक ओर भार डाल दीजिए ।

तैरता चबूतरा तकरीबन तैयार है।

किसान की जुबानी
चबूतरा ज्यादा पतला रहा तो पौधे ढंग से नहीं रुकेंगे, लेकिन एक ही दिन में ज्यादा मोटा पाठ भी नहीं बनाना चाहिए । क्योंकि उससे भी पौधे अच्छी तरह नहीं उगेंगे।पहले एक परत बनानी है फिर उसे करीब 10 दिनों तक सडनें देना है और इसके बाद दूसरी परत लगानी है।

जब आप तैरता बगीचा बना रहे हो उसी वक्त सब्जियों के अंकुरित बीज भी उगाना शुरू कीजिए। तैरते बगीचे आपके घर से दूर हो सकते हैं तो ऐसे में अंकुरित बीज वहां उगाने हैं जहां उनका पूरा ध्यान रख सके।

बत्तक और चूहे बीच खा सकते हैं इसलिए हम अपने घरों में पौधों की एक ढेरी बनाते हैं।

किसान की जुबानी

अंकुरित बीज भारी बरसात से बर्बाद हो सकते हैं तो हम घास से छायादार तंबू बनाते हैं । भारी बरसात में हम अंकुरित बीजों को ढक देते हैं पर जब धूप निकल आती है तो हम तंबू हटा देते हैं। ताकि वह अच्छी तरह उग सके।

कंपोस्ट की ढेरी बनाने के लिए पिछले साल के तैरते पाठ में से सडी हुई जलकुंभी को इकट्ठा कीजिए।
सडी जलकुंभी को एक-दो दिन आंगन में रहने दे ताकि उसमें से पानी निकल जाए ।

कंपोस्ट में से पतवार और पौधे के बड़े हिस्से निकाल दीजिए । मुट्ठी भर कंपोस्ट की गोलाकार डेरी बनाइए और अपने अंगूठे से हलका सा दबाइए ।

उसमें सब्जी के कुछ बीज डाल कर थोडी सी कंपोस्ट से ढक दीजिए।

ढेरी को लाइन में रखना है और उन्हें प्लास्टिक के कट्टे से ढकना है। ताकि भारी बरसात और धूप से बचाव हो। दो-तीन दिन बाद बीज अंकुरित होंगे और तब कटे को हटा सकते हैं।

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अंकुरित बीजों को मुर्गियों और बच्चों से बचाने के लिए बाड लगाना चाहिए और अंकुरित बीजों को बरसात से बचाने के लिए छत बनानी जरूरी है।

10 दिनों बाद पौध को तैरते चबूतरे पर रोपा जा सकता है।

पौध को तैरते चबुतरे तक ले जाएं।

पौध को तैरते चबुतरे पर कैसे रोपित करें

चबूतरे पर जलकुंभी की ऊपरी परत को छोटे टुकड़ों में काटकर हर 25 सेंटीमीटर पर गड्ढा बनाए।

इन गड्ढों में थोड़ा सा कंपोस्ट डालिए और अंकुरित बीजों वाली ढेरी भी। इससे नयी जड़ों को उगनें में आसानी होगी।

15 दिनों बाद जब पौधों पर नयी डाली आएंगे और वह घने होंगे तो वह आसानी से गिर सकते हैं। तैरते चबुतरे के सड रहे किनारों को काट दीजिए और इसे हर पौधे के जड़ों के इर्द-गिर्द रखें । ताकि वह सीधा रहे। इससे पौधों को पोषक तत्व भी मिलेंगे । अगर लगातार धुप हो और पौधा सूखने लगे तो उसे पानी दे।

तैरते चबुतरे पर कौन सी सब्जियां और मसाले उगाए जा सकते हैं ?

गोपालगंज के किसान दो कतारों में भिंडी उगाते हैं
बीच में वो खीरा या लौकी घीया जैसी कोई ओर सब्जी उगाते है।

तैरता बगीचा

इसके किनारों पर रतालू उगा सकते हैं ।क्योंकि उसे पानी ज्यादा लगता है ।

कुछ अनुभवी किसान तो तैरते चबुतरे को बांस और जूट की रस्सी से जोड़कर बेल वाली फसलें लगाते हैं।

कुछ फसलों के लिए आपको पौध कंपोस्ट के ढेर में नहीं उगाना पड़ता ।

हल्दी उगाने के लिए आपको उसकी जड को तैरते चबुतरे पर लगाना है।

पिछले साल के चबुतरे को नये चबुतरे से ढक दीजिए और फिर हल्दी बो दीजिए ।

आमदनी का एक और जरिया है हल्दी के पौधों के बीच लाल अमृत यानि लाल चौलाई के बीज बोना ।

यह फसल 15 दिनों में निकलती है । यानि हल्दी की फसल काटने से काफी पहले ।

हर फसल की तरह है इसमें भी कुछ चुनौतियां हैं। और सब्जियों के तैरते बगीचों के लिए चूहे सबसे बड़ी मुसीबत है ।

लेकिन मेहनत और चुनौतियों पर इसके फायदे भारी पड़ते हैं। तैरते चबुतरे जलकुंभी के इस्तेमाल का अच्छा तरीका है। जो कई बार पानी में दिक्कत पैदा करती है।

बारिस के बाद तैरते चबुतरे को उथले पानी से निकाल दीजिए।

किसान की जबानी

जब पानी कम होता चला जाएगा चबूतरा आखिर में जमीन के संपर्क में आएगा । इस दौरान हमें भिंडी के पौधे उखाड़ने हैं ।

जब बाढ का पानी उतर जाए तो चबुतरे के टुकडे करके जैविक खाद के तौर पर खेत में डालना है।

किसान की जबानी

सडे हुए जलकुंभी को फैलाकर डालने के बाद हम बंद गोभी, ब्रोकली ,टमाटर बैंगन ,मिर्च और हरी पत्तेदार सब्जियां उगाते हैं। हमें रासायनिक उर्वरक की जरूरत बिल्कुल भी नहीं पड़ती क्योंकि कंपोस्ट जलकुंभी हमारा खाद है।

अगले साल कंपोस्ट की ढेरी बनाने के लिए थोड़ा सा कंपोस्ट बचा कर रखिए।

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