किसान हितेषी नही है प्रस्तावित 27 कीटनाशको पर प्रतिबन्ध

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किसान हितेषी नही-प्रस्तावित 27 कीटनाशको पर प्रतिबन्ध-डा. लाठर

कृषि मंत्रालय ने 14 मई को एक अधिसूचना जारी करके, ज़िन 27 कीटनाशकों – खरपतवारनाशको पर प्रतिबंध लगाने की बात की है उससे भारतीय कृषी और किसानो को एक बडा झटका लगने की संभावना  है  कियोकी खरपतवार, कीट , बीमारियो आदि  की उचित रोकथाम  नही होने से फसल की पैदावार मे भारी  कमी आयेंगी  और किसानो पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ेंगा. आधुनिक कृषी विज्ञान मे , सभी फसलो की उन्नत खेती के लिए खरपतवारनाशको -कीटनाशकों की प्रमुख भूमिका है ! ज़िन 27 कीटनाशको पर प्रस्तावित प्रतिबन्ध की बात की जा रही है उनको सरकार ने  कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत पंजीकृत किया था और देश मे 1970 से मानव और  पशु जीवन व पर्यावरण पर  किसी प्रतिकुल प्रभाव बिना कृषि मे प्रयोग कीये जा रहे है !

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27 कीटनाशको पर प्रतिबन्ध

यह सर्वविदित है  कि  ग्रामीण क्षेत्र मे मजदूरों की कमी  और मजदूरी महंगी होने से खरपतवारनाशक और कीटनाशक किसान और कृषि की एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ! पेस्टीसाइड्स मैन्युफैक्चरर्स एंड फॉर्म्युलेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, कीटनाशक पर प्रतिबंध लगाने से किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा क्योंकि 27 कीटनाशकों की औसतन  कीमत 250-450 रुपये प्रति लीटर है जबकि किसानों के लिए  उपलब्ध विकल्प आयातित  होने  के कारण बहुत  महंगे हैं उसकी लागत 1200-2000 रुपये प्रति लीटर है. उधारण के तौर पर प्रस्तावित प्रतिबन्ध मे शामिल 50 वर्ष  से प्रयोग हो रही  पेंडीमेथेलीन खरपतवारनाशक ज़िसे भारत मे 300 से ज्यादा सरकारी और प्राईवेट कम्पनिया बनाती  है की कीमत मात्र 200 रूपये प्रति  लीटर है जबकी इसका विकल्प नोमिनी  गोल्ड एक आयातित  और बहुत  महंगी  खरपतवारनाशक है ज़िसकी  कीमत 5000-8000 रूपये लीटर है  जिससे विभिन्न फसलो के अनुसार खेती की लागत 10-25% तक बढ़ जायेंगी है जो सरकार के आत्म निर्भर भारत और किसान की आय वर्ष -2022  तक दुगनी करने के वायदे के भी खिलाफ है केन्द्रिय ड्राफ्ट नोटिफिकेशन, ‘बैनिंग ऑफ इनसेक्टिसाइड्स ऑर्डर 2020‘ शीर्षक से, 27 कीटनाशकों के आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन, वितरण और उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है  जिसमें ऐसफेट, अल्ट्राजाईन, बेनफराकारब, बुटाक्लोर, कैप्टन, कारबेडेंजिम, कार्बोफ्यूरान, क्लोरप्यरिफॉस, 2.4-डी, डेल्टामेथ्रीन, डिकोफॉल, डिमेथोट, डाइनोकैप, डियूरॉन, मालाथियॉन, मैनकोजेब, मिथोमिल, मोनोक्रोटोफॉस, ऑक्सीफ्लोरीन, पेंडिमेथलिन, क्यूनलफॉस, सलफोसूलफूरोन, थीओडीकर्ब, थायोफनेट मिथाइल, थीरम, जीनेब व जीरम शामिल है 

27 कीटनाशको पर प्रतिबन्ध

दुनिया की बढ़ती आबादी के लिए भोजन की मांग को पूरा करने के लिए कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग करना जरूरी है. हालांकि उर्वरकों और कीटनाशकों के बेतहाशा इस्तेमाल से खेती जहरीली होती जा रही है जिससे बचाव के लिए  प्रतिबन्ध कोई समाधान नही , बल्की किसान को ऊचित मार्ग दर्शन की ज़रुरत है की खरपतवारनाशक और कीटनाशकों को केवल अनुमोदित मात्रा और विधि से ही प्रयोग करे और बाजार मे अंधाधुंध बिक रहे नकली कीटनाशकों पर भी अंकुश लगाने की ज़रुरत है . पीएमएफएआई निर्माताओं के अनुसार, जेनेरिक कीटनाशक घरेलू बाजार में 40 प्रतिशत और भारत से होने वाले निर्यात का 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं. अगर भारत में 27 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है तो वार्षिक  12,000 करोड़ रुपये के इन उत्पादों का संपूर्ण निर्यात बाजार चीन के हाथों में चला जाएगा, जो वैश्विक बाजार में भारत का मुख्य प्रतिद्वंदी है. इन्ही तथ्यो को ध्यान मे रखते  हुए ,  सरकार  को 27 कीटनाशको पर प्रतिबन्ध पर दौबारा सोच  विचार करना चाहिए  !

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