Spirulina Farming ! 100 मीटर क्षेत्र से कमाई 35 से ₹40000 प्रति माह

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देश में नई नहीं है Spirulina की खेती केवल 100 मीटर क्षेत्र से कमाई 35 से ₹40000 प्रति माह। लागत कम मुनाफा ज्यादा।

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परिचय

दुनिया भर में एलगी की एक हजार से ज्यादा प्रजातियां हैं। लेकिन उनमें से सिर्फ एक ही प्रजाति ऐसी है जो खाई जाती है और यह पौष्टिक गुणों से भरपूर है इसका नाम है स्पीरूलिना जिसे कुछ लोग ब्लू ग्रीन एलगी के नाम से भी जानते हैं ।

प्राचीनकाल से ही लोग इसका औषधि व पूरक आहार के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। नए दौर में भी इस पर वर्षों से अनुसंधान हो रहे हैं। कुपोषण व अनेक खतरनाक व जानलेवा बीमारियों से ग्रस्त लोगों पर इसका परीक्षण किया गया तो नतीजे काफी सकारात्मक निकले।

कुछ रिसर्च में पाया गया कि 1 किलोग्राम स्पीरूलीना में 4 किलोग्राम फलों और सब्जियों के बराबर पोषण मौजूद होता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे सुपर फूड की श्रेणी में रखते हुए विकासशील देशों में कुपोषण की समस्या को खत्म करने के लिए बच्चों को Spirulina खिलाने की बात कही है।

अब बात अगर इसकी खेती की करें तो Spirulina की खेती खारे पानी में की जा सकती है। इसलिए समुद्री क्षेत्रों के आसपास इसे करने में आसानी होती है। लेकिन साधारण पानी के साथ थोड़ा ट्रीटमेंट कर के टैंक के पानी का पीएच मान कम से ज्यादा कर लिया जाए तो इसे दूसरी जगहों पर भी आसानी से उगाया जा सकता है ।


Spirulina Farming की मूल बातें

Spirulina की खेती कच्चे व पक्के दोनों तरह के टैंक बना करके की जा सकती है। बस कच्चे टैंक में पॉलिथीन बिछाने होती है ।अब बात अगर टैंक के साइज की करें टैंक का आकार अपने हिसाब से रख सकते हैं।

लेकिन ध्यान रखें कि जो चौड़ाई है उसके दुगने से ज्यादा लंबाई होनी चाहिए ।क्योंकि चौड़ाई अगर ज्यादा होगी तो इससे Spirulina को निकालने में परेशानी होगी लेकिन हां टैंक की जो गहराई है वह डेढ़ से दो फीट ही रखें ।टैंक में 8 इंच तक खारा पानी भरा जाता है।

जो लोग समुद्र के पास नहीं रहते हैं लेकिन फिर भी Spirulina लगाना चाहते हैं तो वे साधारण पानी को टैंक में भरकर इसके लिए उसे समुद्र के पानी जैसा खारा बना लें। इसके लिए एनपीके NPK ,नमक ,खाने का सोडा, मैग्नीशियम सल्फेट आदि मिलाकर पीएच मान 10 से 11 तक कर ले। अब इस पानी में Spirulina का बीज डाल दें।

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पानी में बीज डालने की भी अलग तकनीक है जिसमें मदर कल्चर को एक कपड़े में बांधकर उसे पानी में घुमाते हुए चारों तरफ मिलाते जाएं । इसमें ऑक्सीजन और धूप अंदर तक जाते रहनी चाहिए। इसके लिए पानी को बाईपास से घुमाना पड़ता है या फिर टरबाइन लगाए जाते हैं जो पानी को घुमाते रहते हैं । इन टरबाइन को हर एक से 2 घंटे बाद 10 से 15 मिनट के लिए चलाया जाता है।

जब Spirulina के पौधे पानी पर तैरने लगें तो इन्हें बाल्टी में इकट्ठा कर ले। आटा छानने वाली मोटी छन्नी में इस हरे पानी को डालते हुए कपड़े से छान लें। अब इसे 2 बार साफ पानी से धोकर छायादार और बंद जगह पर रख कर सुखा लें ।


अब हमने इसे मोटी छलनी से छानने की बात कही है तो वह इसलिए जरूरी होता है कि अगर कोई बाहर का कचरा या गंदगी पानी में चली जाएगी तो वह Spirulina में ना जाए। इसके लिए मोटे होने का इस्तेमाल किया जाता है ।

Spirulina की ट्रेनिंग

हां अगर आप Spirulina की खेती करना चाहते हैं तो इसके लिए ट्रेनिंग जरूर ले। इसका 8 से 10 दिन का कोर्स आप कर सकते हैं Spirulina अकैडमी माइक्रो स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज से।

आप इसकी ट्रेनिंग ले सकते हैं तमिल नाडु फिशरीज यूनिवर्सिटी माधवाराम चेन्नई। और मदुरई स्पायरोलेना प्रोडक्शन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर तमिलनाडु से आप इसकी ट्रेनिंग ले सकते हैं या फिर जो लोग पहले से ही Spirulina की खेती करते हैं उनसे भी आप इसकी ट्रेनिंग ले सकते हैं।8 से 10 दिन का कोर्स करके आप इस खेती की शुरुआत कर सकते हैं।

जहां पर आप इसकी खेती की ट्रेनिंग लेंगे वहीं से ही आपको इसकी मार्केटिंग के बारे में भी ट्रेनिंग मिल जाएगी।

सावधानियां

जब खेती करते हैं तो कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है। जैसे Spirulina के लिए टेंट खुले आसमान के नीचे भी बनाए जा सकते हैं। लेकिन धूल मिट्टी या अन्य गंदगी पानी में ना गिरे इसके लिए इसको ढक करके रखा जाए तो ज्यादा अच्छा है।

टैंक बनाते समय ध्यान रखें कि जितनी टैंक की चौड़ाई है लंबाई उसकी दोगुनी रखें । जबकी गहराई डेढ़ फीट या 2 फीट ही रहेगी । जो लोग मीठे पानी में Spirulina लगा रहे हैं वे विशेष ध्यान रखें कि बरसात के मौसम में ज्यादा बारिश होने पर पानी में नमक व पीअच कम हो जाता है, तो भी इसकी उपज कम हो सकती है ।

इसीलिए जो किसान मीठे पानी में इसे लगा रहे हैं वह ऐसे वक्त पर इसमें खाने का सोडा व नमक आदि मिलाकर इसके खारापन को बनाए रखें। टैंक बनाते समय लंबाई पूर्व से पश्चिम की ओर रखें ताकि पूरी धूप पानी पर पढ़ सके ।

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