अंजीर की खेती/ Fig Farming – ना खाद की जरूरत ना ज्यादा पानी की , अंजीर की खेती की पुरी जानकारी

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अंजीर की खेती

अंजीर की खेती/ Fig Farming

अंजीर जिसे मंजुला, दुमुर या फिग आदि के नाम से जाना जाता है । इसका वानस्पतिक नाम है Ficus carica । अंजीर को सबसे पुराने फलों के रूप में गिना जाता है । ये ताजे फल के रूप में भी खाया जाता है और सूखे मेवे के रूप में भी।

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अंजीर को सेहत के लिए काफी उपयोगी माना जाता है । इसमें कैलोरी ,फैट, सोडियम, कार्बोहाइड्रेट ,फाइबर, शुगर ,प्रोटीन तथा विटामिन ए और बी काफी मात्रा में पाए जाते हैं । ये खून की कमी को दूर करता है । शारीरिक दुर्बलता दूर करता है । हाई ब्लड प्रेशर ,लिवर की समस्या या पेट के रोग में लाभप्रद माना जाता है ।

जितना यह सेहत के लिए फायदेमंद है उतना ही किसान की जेब के लिए भी । तो आप भी करें अंजीर की खेती । चलिए सबसे पहले देख लेते हैं कि अंजीर की खेती के लिए जलवायु कैसी होनी चाहिए

अंजीर की खेती के लिए जलवायु

भारत में लगभग सभी क्षेत्रों में जहां उपोष्ण उष्ण जलवायु हो वहां पर अंजीर की खेती आसानी से की जा सकती है । 35 से 48 डिग्री तक का तापमान ये आसानी से सह लेता है । सर्दियों में 20 डिग्री से नीचे तापमान होने पर इसका पौधा विकास करना बंद कर देता है ।

अभी की अगर बात करें तो महाराष्ट्र कर्नाटक राजस्थान हरियाणा में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा रही है । इसके अलावा गुजरात उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी अंजीर की खेती होने लगी है ।

अंजीर की खेती के लिए भूमि

जब बात आती है इसके लिए भूमि की तो अंजीर को किसी भी तरह की भूमि में उगाया जा सकता है । यहां तक कि जो भूमि कम उपजाऊ है वहां भी आसानी से हो जाती है लेकिन फिर भी अगर इसकी अच्छी फसल लेना चाहते हैं तो दोमट या मटियार दोमट भूमि जिसका पीएच मान 7 से 8 हो वो इसके लिए सबसे अच्छी मानी जाती है । इसके लिए प्रजाति कौन कौन सी है ये भी देख लेते हैं ।

अंजीर की किस्में / प्रजातियां

अंजीर की किस्में हैं
पूना
दौलताबाद
गंजम
कोयम्बटूर
मेंगलोर
सहारनपुर आदि ।
इनमे से पूना जो किस्म है वो ताजे फलों के लिए काफी अच्छी रहती है ।

अंजीर को लगाने का समय/ अंजीर की खेती का समय

लगाने का समय दिसंबर जनवरी या जुलाई अगस्त में इसकी पौध की रोपाई की जाती है ।

अंजीर की नर्सरी

अंजीर की खेती/ Fig Farming

बात करते हैं नर्सरी की कम से कम दो से तीन वर्ष पुराने पेड़ की एक से दो सेंटीमीटर मोटी , 15 से 20 सेंटीमीटर लंबी कलमों द्वारा तैयार की जाती है। मात्र पौधों से सर्दियों में कलमें लेकर इन्हें एक से दो महीने तक कैल्सिंग के लिए मिट्टी में दबाया जाता है । फरवरी से मार्च में जैसे ही तापमान बढ़ने लगता है इन कलमों को निकाल कर 15 गुणा 15 सेंटीमीटर की दूरी पर नर्सरी में रोपित किया जाता है ।

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अंजीर की खेती के लिए खेत की तैयारी

खेत की तैयारी जून जुलाई में दो गुणा दो गुणा दो फीट के गड्ढे यानि दो मीटर लंबे दो मीटर चौड़े और दो मीटर गहरे गड्ढे खोद लें । ये गड्ढे आठ आठ मीटर की दूरी पर खोद सकते हैं । यदि सघन लगाना चाहते हैं तो गड्ढों की दूरी कम कर सकते हैं । अब इन गड्ढों को 10 से 15 दिन के लिए धूप लगने के लिए खुला छोड़ दें ।

प्रति गड्ढा 20 किलो गोबर की सड़ी हुई खाद डालें । साथ में दीमक की दवा की फास भी डालें । प्राकृतिक खेती में गोबर की खाद के साथ नीम की खली या नीम के पत्तों का इस्तेमाल करें । 60 से 65 दिन की पौध को नर्सरी से निकालकर खेत में रोपाई कर दें । एक बार लगाने के बाद 50 60 वर्षों तक अंजीर की उपज ली जा सकती है ।

अंजीर की खेती की सिंचाई

जब बात आती है सिंचाई की तो आपको बता दें कि इसमें सिंचाई की ज्यादा आवश्यकता नहीं पड़ती है । गर्मियों में हल्के पूर्ण वृद्धि के लिए एक या दो सिंचाई देना पर्याप्त रहता है । ड्रिप सिंचाई दे रहे हैं तो 15 20 दिन पर एक सिंचाई दे सकते हैं ।

अंजीर की खेती में खाद व उर्वरक

जब बात आती है खाद और उर्वरकों की । अंजीर के छोटे पौधों को एक से तीन वर्ष में 7 से 10 किलो गोबर की खाद 3 वर्ष की आयु तक देनी चाहिए और जब पौधे बड़े होने लगें । 15 से 25 किलोग्राम गोबर की खाद प्रति पौधा प्रति वर्ष डालनी चाहिए ।

उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार करें । वैसे आपको बता दें कि अंजीर की फसल बिना उर्वरकों के प्रयोग के भी अच्छी पैदावार दे देती है । पांच साल तक अंजीर के साथ अन्य फसलें भी लगा सकते हैं जिनमें दाल व सब्जियों की खेती हो सकती है । ध्यान रखें कि अंजीर के साथ में जो भी फसल लगा रहे हैं उसकी ऊँचाई अंजीर के पेड़ से कम होनी चाहिए ।

अंजीर के फल की तुडाई

फल की तुड़ाई अंजीर की प्रजाति पर निर्भर करता है कि यह आठ माह बाद उपज देगी या डेढ़ से दो साल पर । शुरू शुरू में फल कम लगते हैं लेकिन पेड़ परिपक्व हो जाता है । लेकिन जैसे जैसे पेड़ परिपक्व हो जाता है तो 25 से 30 किलोग्राम तक प्रति पेड़ उपज मिल जाती है । फल तोड़ते समय दस्ताने जरूर पहनें ।क्योंकि अक्सर तुड़ाई के समय पेड़ से एक रस निकलता है जो हाथों पर लगने के बाद में आपको खुजली पैदा कर सकता है । इसके अलावा ये भी ध्यान रखें कि फलों को डंठल के साथ ही निकालें नहीं तो इसमें फंगस लगने का डर रहता है ।

अंजीर के फल के लिए बाजार

अंजीर के फलों की बाजार में अच्छी मांग रहती है । इसके फलों की ग्रेडिंग कर खुले बाजार में या फिर फ्रूट मंडी में बेचा जा सकता है । इसके अलावा एक छोटी सी प्रोसेसिंग करके बेचने पर अच्छी कीमत मिल जाती है । इसे आनलाइन भी बेचा जा सकता है तो आप भी अंजीर के मुनाफे में खेती कर सकते हैं ।

अंजीर को English में क्या कहते हैं ? /anjeer in english

अंजीर को English में Fig कहते हैं

अंजीर को खाने के क्या फायदे हैं ? / Health benefits of anjeer / anjeer ke fayde /Fig

अंजीर खाने के फायदे
इसमें कैलोरी ,फैट, सोडियम, कार्बोहाइड्रेट ,फाइबर, शुगर ,प्रोटीन तथा विटामिन ए और बी काफी मात्रा में पाए जाते हैं । ये खून की कमी को दूर करता है । शारीरिक दुर्बलता दूर करता है । हाई ब्लड प्रेशर ,लिवर की समस्या या पेट के रोग में लाभप्रद माना जाता है ।

अंजीर का वानस्पतिक नाम क्या है ? Botanical name of anjeer / Fig

अंजीर का वानस्पतिक नाम Ficus carica है

अंजीर की कीमत क्या है ? / Price of anjeer fruit

800 – 1000 INR / Kilogram

भारत मे अंजीर की खेती कहां होती है ? / Farming of anjeer in india

महाराष्ट्र ,कर्नाटक ,राजस्थान ,हरियाणा,गुजरात उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश


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