Scientific Farming of potato आलू की खेती – कम लागत ज्यादा मुनाफा

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देश भर के कुछ हिस्सों में किसान वर्ष भर आलू की खेती करते हैं। आलू की उपज क्षमता के मुताबिक सभी फसलों से ज्यादा आलू पोषक तत्वों से भरपूर होता है जिसका सेवन पौष्टिक आहार के रूप में गरीब हो या अमीर हर कोई करता है ।

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आलू की खेती

आलू में 14 प्रतिशत स्टार्च 2 प्रतिशत चीनी 2 प्रतिशत प्रोटीन 1 प्रतिशत खनिज लवण पाए जाते हैं । वसा 0.1 एक प्रतिशत कुछ मात्रा में विटामिन होते हैं । वैसे यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि आलू एक ऐसी फसल है जो बढ़ती आबादी को कुपोषण और भुखमरी से बचाने में सहायक है । इसी वजह से आलू की मांग के हिसाब से इसके उत्पादन में इजाफा जरूरी है तो आलू की फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिए जरूरी है कि किसान परंपरागत तरीके से आलू की खेती करने की बजाय आलू की वैज्ञानिक खेती करें ।

Table of Contents

आलू की खेती के लिए जलवायु

जहां तक बात है जलवायु की तो आलू की बढ़वार के लिए फसल अवधि के दौरान दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 14 से 15 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए । फसल के कंद बनते समय 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तक तापमान उत्तम माना जाता है । कंद बनने की अवस्था में यदि तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाए तो कंधों विकास पूरी तरह रुक जाता है ।

आलू की खेती के लिए जरूरी मिट्टी

आलू की खेती के लिए अच्छे जल निकासी वाली जीवांश युक्त बलुई दोमट मिट्टी उत्तम मानी जाती है । क्षारीय जल भराव वाले खारे पानी में आलू की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती ।

आलू की खेती के लिए खेत को तैयार कैसे करें

बात करें खेत की तैयारी की तो सबसे पहले खेत की तीन से चार जुताई करें । आलू की खेती में पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें बाकी जुताई देसी डिस्क हैरो या कल्टीवेटर से आप कर सकते हैं । हर जुताई के बाद पाटा जरूर लगाएं । आलू की बुआई किस्मों के आधार पर की जाती है ।

बुआई का उतम समय

आलू की खेती में अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए आलू की बुआई का उत्तम समय अक्टूबर की शुरुआत से 10 नवंबर के बीच अगेती फसल सितंबर के दूसरे सप्ताह में भी आप लगा सकते हैं ।

बीज को लेकर कुछ सावधानियां

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ध्यान रहे कि बीज आप किसी विश्वसनीय स्त्रोत से ही खरीदें । सफल खेती के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त बीज प्राप्त होना बेहद जरूरी है इसलिए प्रमाणित बीज किसी विश्वसनीय संस्थान या एजेंसी से ही खरीदना चाहिए । खुद बीज बोते हैं तो हर तीन चार साल बाद बीज को बदलते रहें । बीज खरीदते वक्त ये ध्यान रखें कि बीज का वजन 25 से 40 ग्राम के बीच हो क्योंकि इससे ज्यादा या कम वजन और आकार वाला बीज लाभकारी नहीं माना जाता ।

आलु में मौजुद तत्व

आलू की खेती

आलू में 14 प्रतिशत स्टार्च 2 प्रतिशत चीनी 2 प्रतिशत प्रोटीन 1 प्रतिशत खनिज लवण पाए जाते हैं । वसा 0.1 एक प्रतिशत कुछ मात्रा में विटामिन होते हैं ।

आलु की किस्में

अब बात करें किस्मों की तो

आलू की खेती में

अगेती फसल लेने के लिए किस्म

आलू की खेती

श्री पुखराज कुफरी
अशोका कुफरी
बेर कुफरी
बहार कुफरी
चंद्रमुखी कुफरी
ख्याती कुफरी
कुफरी सूर्या
कुफरी जवाहर

ये सभी किस्में 80 से 60 दिन में तैयार हो जाती हैं और पैदावार देती हैं 200 से ढाई सौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर ।

मध्यकालीन फसल के लिए

कुफरी बादशाह
कुफरी लालिमा
कुफरी बहार
कुफरी ज्योति
कुफरी कंचन
राजेंद्र आलू 1
राजेन्द्र आलू 2
राजेन्द्र आलू 3

ये सभी किस्में सौ से 120 दिन में तैयार हो जाती हैं और इनका उत्पादन प्रति हेक्टेयर रहता है 200 से 300 क्विंटल

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पछेती फसल के लिए

कुफरी सुंदरी
कुफरी अलंकार
कुफरी सफेद
कुफरी चमत्कार
कुफरी देवा
कुफरी किसान

आप कोई भी किस्में चुन सकते हैं । ये किस्में 120 से 130 दिन में तैयार हो जाती हैं । इन किस्मों का उत्पादन 250 से 350 क्विंटल रहता है।

चिप्स के लिए आलू की किस्में

यदि आप चिप्स के लिए उपयोग होने वाले आलू की खेती करना चाहते हैं तो उसके लिए

कुफरी चिप्सोना एक
कुफरी चिप्सोना दो
कुफरी चिप्सोना तीन
कुफरी आनंद

में से कोई भी किस्में चुन सकते हैं । ये किस्में सौ से 110 दिन में तैयार होती हैं और प्रति हेक्टेयर तीन सौ से साढ़े तीन सौ क्विंटल की उपज देती है ।

आलू की खेती में बीज की मात्रा

आलू की खेती

बात आती है आलू की खेती में बिजाई के लिए बीज की मात्रा की तो हमने आपको बताया कि मध्यम आकार यानि 40 ग्राम तक के बीज का अगर आप चुनाव करते हैं तो प्रति हेक्टेयर 40 से 50 क्विंटल बीज की आपको जरूरत पड़ेगी अगर 25 ग्राम के बीज का चुनाव करते हैं तो 25 से 30 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयर आपको चाहिए होगा । हां ये देखने के बीज पर कम से कम दो आंखें जरूर हों । इसके बाद बुआई के पहले बीज अंकुरित जरूर करें ।

आलू का बीज अंकुरण के लिए क्या करें ?

बीज को अंकुरित करने के लिए । बिजाई से 15 से 20 दिन पहले आलू को बोरों से निकालकर अंकुरित करने के लिए किसी हवादार कमरे में फर्श पर फैला दें । जहां धूप न आती हो और रोशनी कम रहती हो । इससे बीजों का अंकुरण जल्दी होता है । ध्यान रहे बीच बीच में बीजों का निरीक्षण करते रहें और खराब कमजोर व छोटी आंखों वाले आलुओं को निकाल दें ।

बुआई से पहले अंकुरण का फायदा

अब आप सोचेंगे कि बुआई से पहले अंकुरण का क्या फायदा है । पुर्णअंकुरण वाले बीजों में कंद जल्दी उगते हैं ।

छायादार जगह पर सुखाने से कंद कम सडते हैं।मृदा जनित फफुंद से बचाव होता है ।
पौधों की बढ़वार भी अच्छी होती है ।

प्रति पौधे तने ज्यादा निकलते हैं और कंद भी जल्दी बनते हैं ।

अब आपको अंकुरित बीज की बुआई कैसे करनी है इसके लिए सबसे पहले अंकुरित बीज को सावधानी से खेत तक पहुंचाएं । ध्यान रहें कि बीज की आखें यानि अंकुरित आलु टुटे ना।

आलू का बीज बोने ये पहले कुछ सावधानियां

आलु बुवाई से पहले बीजोपचार जरूर करें । बीजोपचार से फसल का बीमारियों से बचाव होता है, उत्पादन भी बेहतर होता है । बीजोपचार के लिए 0.2 प्रतिशत मेंकोजैब दवा में 20 मिनट तक बीज को उपचारित करें और छायादार स्थान पर सुखाएं ।

ध्यान रहे कि बीजोपचार करने के 24 घंटे के अंदर अंदर बुआई कर देनी चाहिए ।

आलू की बुआई में कतारों की दुरी

आलू के लिए खेत में 50 से 60 मीटर की दूरी पर कतारे बनाएं और बीज से बीज की दूरी रखें 15 से 20 सेन्टीमीटर

पछेती किस्मों में वानस्पतिक बढ़वार ज्यादा होती है । यहां आप कतार से कतार की दूरी 60 से 65 सेन्टीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 25 सेंटीमीटर रख सकते हैं ।

बलुई मिट्टी में 10 से 15 सेंटीमीटर की गहराई पर बीज लगाएं । दोमट मिट्टी में 8 से 10 सेंटीमीटर की गहराई पर बीज को रखा जाता है ।

आलू बुआई की एक विधि है समतल भूमि में आलू रखकर मिट्टी चढ़ाना।
एक अन्य विधि है जिसमें मेड़ों पर आलू की बुआई की जाती है । ज्यादा नमी वाली भूमि के लिए आलू बुआई की ये विधि अच्छी मानी जाती है ।

अगर आप मिट्टी चढ़ाकर आलू बोते है तो बुआई के 25 से 30 दिन बाद निराई गुड़ाई करें और मिट्टी चढ़ा दें । बीच बीच में निरीक्षण जरूर करें और अगर कोई कंद मिट्टी से बाहर नजर आए तो उसे ढक दें । कंद खुले रह जाएं तो वो हरे हो जाते हैं ।

उर्वरक और खाद की मात्रा

आलू की खेती को अधिक मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत होती है । इस फसल के लिए प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में सड़े गोबर की खाद 20 टन और पांच क्विंटल खली डालें ।

रासायनिक उर्वरकों में प्रति हेक्टेयर की दर से 150 किलोग्राम नाइट्रोजन 330 किलोग्राम यूरिया डालें । यूरिया की आलू की खेती में कौन सी खाद डालेंआधी मात्रा यानी 165 किलोग्राम बुआई के समय और बाकी की आधी मात्रा यानि 165 किलोग्राम बुआई के 30 दिन बाद मिट्टी चढ़ाने के समय डालनी चाहिए ।
90 किलोग्राम फास्फोरस के लिए प्रति हेक्टेयर 200 किलोग्राम डीएपी और 560 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट डालें ।
वहीं 100 किलोग्राम पोटाश के लिए प्रति हेक्टेयर 170 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश बुआई के समय डालना चाहिए ।

आलू की सिंचाई

जहां तक बात है सिंचाई की तो आलू की खेती में बुआई से 10 से 20 दिन के भीतर पहली सिंचाई करें । फिर 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें । सिंचाई करते समय ये ध्यान रखें कि मेड़ पानी में दो तिहाई से ज्यादा ना डुबे।फसल सुरक्षा के लिए हानिकारक कीटों व रोगों से फसल का बचाव जरूर करें । ध्यान रखें कि किसी भी रोग या कीट के लक्षण दिखने पर तुरंत कृषि सलाहकार की राय लेकर ही दवाओं का इस्तेमाल करें ।

आलू की खुदाई

किस्म के आधार पर आलू की खेती तैयार होती है । अमूमन 80 से 90 दिन में आलू की फसल तैयार हो जाती है तो ऐसे में खुदाई से हफ्ता दस दिन पहले पत्तों को काट देना चाहिए और दस दिन बाद खुदाई शुरू करें । खुदाई के दौरान ये ध्यान रखें कि खुदाई यंत्र कंदों पर नहीं लगना चाहिए । आलू की खुदाई करके तीन चार दिन छायादार स्थान पर रखें।

आलु का भण्डारण

कच्चे फर्श पर पतली सतह के रूप में आलु को बिछाकर रखें तो आलु को भण्डारण किया जा सकता है।

आलू की चिप्स बनाने के लिए किस किस्म के आलू इस्तेमाल होते हैं?

कुफरी चिप्सोना एक
कुफरी चिप्सोना दो
कुफरी चिप्सोना तीन
कुफरी आनंद

आलू की खेती में कौन सी खाद डालें ?

इस फसल के लिए प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में सड़े गोबर की खाद 20 टन और पांच क्विंटल खली डालें. रासायनिक उर्वरकों में प्रति हेक्टेयर की दर से 150 किलोग्राम नाइट्रोजन 330 किलोग्राम यूरिया डालें । यूरिया की आलू की खेती में कौन सी खाद डालेंआधी मात्रा यानी 165 किलोग्राम बुआई के समय और बाकी की आधी मात्रा यानि 165 किलोग्राम बुआई के 30 दिन बाद मिट्टी चढ़ाने के समय डालनी चाहिए ।
90 किलोग्राम फास्फोरस के लिए प्रति हेक्टेयर 200 किलोग्राम डीएपी और 560 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट डालें ।
वहीं 100 किलोग्राम पोटाश के लिए प्रति हेक्टेयर 170 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश बुआई के समय डालना चाहिए ।

आलू की खेती कब और कैसे करें ?

आलू की बुआई का उत्तम समय अक्टूबर की शुरुआत से 10 नवंबर के बीच अगेती फसल सितंबर के दूसरे सप्ताह में भी आप लगा सकते हैं ।

आलू की खेती का समय

अक्टूबर की शुरुआत से 10 नवंबर के बीच

आलू की खेती कैसे करें ?

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