अभी शुरू करें मछली पालन ,75% पैसा देगी सरकार

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मछली पालन के क्षेत्र में हमारे देश में अपार संभावनाएं देखी जाती हैं । हमारे देश में लगभग 60 प्रतिशत लोग मछली का सेवन करते हैं क्योंकि इसमें कई तरह की प्रोटीन्स और विटामिन्स पाई जाती हैं । इसीलिए मछलियों की मांग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार बढ़ रही है । आज हम आपको बताएंगे मछली पालन व्यवसाय से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां ।

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मछली पालन का बीमा

मछली पालन में कितने निवेश की जरूरत होती है ?

सबसे पहले तो मछली पालन के लिए आपको निवेश की जरूरत होगी । अगर आप मत्स्य पालन के लिए एक हेक्टेयर भूमि में तालाब बनवाना चाहते हैं तो इसमें करीब 5 लाख तक का खर्च आएगा और नीली क्रांति के तहत कुल निवेश की जो 50 प्रतिशत राशि है वो केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार आपको उपलब्ध करवाएगी । मतलब इस योजना के तहत आपको सिर्फ 25 प्रतिशत धनराशि ही खर्च करनी पड़ेगी ।

मछली पालन के अंदर तालाब की तैयारी कैसे करें

इसके लिए आपके पास पर्याप्त जलापूर्ति का साधन होना चाहिए । तालाब के जो बंधे हैं वो ऊँचे रखें । अगर तालाब के अंदर कहीं टीले नजर आ रहे हैं तो उसकी भी मिट्टी निकालकर के बंधों पर जमा कर दें । अप्रैल मई तक तालाब का सुधार जरूर करवा लें ताकि आपको मछली पालन के लिए समय मिल सके ।

मछली पालन के अंदर तालाब के लिए मिट्टी का चयन

ध्यान रहे कि अगर आप नए तालाब का निर्माण करा रहे हैं तो ये चिकनी मिट्टी में अधिक उपयुक्त रहेगा क्योंकि जल धारण की जो क्षमता है वो चिकनी मिट्टी में अधिक पाई जाती है । मछली की अच्छी पैदावार के लिए तालाब की मिट्टी व पानी का उपयुक्त होना बेहद जरूरी है । मंडल स्तर पर मत्स्य विभाग के प्रयोगशाला द्वारा यह जांच नि:शुल्क की जाती है । सही तरह से तालाब निर्माण के लिए आपको ये जांच करा लेना चाहिए ।

मछली पालन का बीमा

मछली पालन के अंदर जलीय पौधों से बचाव

वहीं तालाब में आवश्यकता से अधिक जलीय पौधे नहीं होने चाहिए यानि खरपतवार नहीं होने चाहिए।ये पौधे पानी का जो बहुत बड़ा भाग होता है उसको घेर लेते हैं और मछलियों की अच्छी उपज के लिए हानिकारक होते हैं ।

मछली पालन के लिए खाद

मछलियों की अच्छी उपज के लिए आप पानी में चूने का प्रयोग कर सकते हैं । एक हेक्टेयर तालाब में 250 किलोग्राम चूने का प्रयोग बीज डालने से एक महीना पहले करना चाहिए । तालाब की तैयारी में गोबर की खाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि इससे मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन उत्पन्न होता है तथा गोबर खाद के प्रयोग से 15 दिन के बाद रासायनिक खाद सिंगल सुपर फास्फेट 250 किलोग्राम, म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलोग्राम ,कुल मिश्रण 490 किलोग्राम 10 समान मासिक किश्तों में प्रयोग किया जाना चाहिए ।

उर्वरक प्रयोग में सावधानी

अगर उर्वरकों के इस्तेमाल से पानी का रंग नीला या हरा हो जाए तो उर्वरकों का प्रयोग तब तक के लिए बंद कर देना चाहिए जब तक पानी का रंग अपनी सही स्थिति में न आ जाए । तालाब में ऐसी मछलियों का बीज ही छोड़ना चाहिए जो एक ही वातावरण में रहकर एक दूसरे को नुकसान न पहुंचाएं ।

मछली पालन के लिए फायदेमंद मछली किस्में / जातियां

मछली पालन के लिए हमारे देश की मेजर कार्प मछलियों में कतला, रोहू व नैन और विदेशी कार्प में सिल्वर कार्प और ग्रास कार्प तथा कॉमन कार्प का पालन ज्यादा फायदेमंद होता है । साथ ही मछली का प्राकृतिक भोजन प्लांटेशन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होना चाहिए ।

मछली पालन
मछली पालन का बीमा

एक एकड तालाब में कितना बीज डालें

ये भी जान लीजिये कि कितने पानी में कितना बीज डालना चाहिए तो आप एक हेक्टेयर जलक्षेत्र में 50 मिलीमीटर आकार से कम की 10 हजार तथा 50 मिलिमीटर से बड़ी 5 हजार अंगुल इकाई डाल सकते हैं। और यदि देशी विदेशी मिलाकर छह प्रकार की मछलियों का पालन करना चाहते हैं तो कतला 20 प्रतिशत, सिल्वर कार्प 10 प्रतिशत, रोहू 30 प्रतिशत, नैन 15 प्रतिशत व कॉमन कार्प 15 प्रतिशत तथा ग्रास कार्प 10 प्रतिशत रखनी चाहिए और
यदि सिर्फ भारतीय मछलियों का ही पालन करना चाहती है तो कतला 40 प्रतिशत, रोहू 30 तथा नैन 30 प्रतिशत इस अनुपात में मार्च अप्रैल व मई में डाल सकते हैं और जो कोर मछलियों का बीज है वह जुलाई अगस्त सितम्बर में प्राप्त किया जा सकता है ।

कहां से खरीदें मछली का बीज

अब बीज कहां से ले सकते हैं ये भी देख लीजिए । मत्स्य पालक
विभाग अभिकरण से संपर्क करें यह हर जिले में होता है आप यहां से बीज से संबंधित जानकारी ले सकते हैं ।

मछली को क्या खाना दिया जाता है?

साथ ही मछली की अच्छी पैदावार के लिए उन्हें पूरक आहार मिलना भी बेहद जरूरी है ।जो आहार आप मछलियों को दे रही हैं वह प्राकृतिक आहार की भाँति मछलियों के लिए पोषक होना चाहिए । आपको प्रोटीन युक्त आहारों का उपयोग करना चाहिए जैसे मूंगफली ,सरसों, नारियल और चावल का कना यानी जो चावल का चोकर होता है उसे बराबर मात्रा में मिलाकर कुल भार 1 से 2 प्रतिशत तक रोज दिया जाना चाहिए ।

मछलियों में होने वाले रोग और उपचार

अब आपको बताते हैं मछलियों को होने वाले प्रमुख रोगों और उनके उपचार के बारे में ।

यु मानस रोग


अक्सर मछलियों को यूं मानस रोग हो जाता है । इसके लक्षण हैं गलत गद्दों का सड़ना । दम घुटने के कारण रोगग्रस्त मछली ऊपरी सतह पर हवा लेने का प्रयत्न करती है । इसका उपचार है प्रदूषण की रोकथाम ।

तालाब में पानी के स्तर को बढ़ाना या प्रति हैक्टेयर 50 से 60 किलोग्राम तक चूने का प्रयोग करना यदि शुरुआती अवस्था में मछलियों के पंखों के किनारे सफेदी आने लगे तो ये फिश तथा टेल रोग हो सकता है । इस रोग के बाद में मछलियों के पंख तथा पूंछ सड़ने लगती है । ऐसी अवस्था में फोलिक एसिड को भोजन के साथ मिला कर इसमें कुल दवा 10 एमएल प्रति सौ लीटर पानी में मिलाकर रोगग्रस्त मछली को करीब 24 घंटे तक
घोल में रखना चाहिए ।

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अल्सर रोग

एक और मुख्य रोग है अल्सर । इसके लक्षणों में शरीर तथा पूंछ पर घाव का पाया जाना होता है । इसके उपचार में पांच मिलीग्राम लीटर की दर से तालाब में पोटाश का प्रयोग किया जाना चाहिए । बीमारी अल्टरनेटिव सिन्ड्रोम इसकी प्रारंभिक अवस्था है । लाल दाग जो धीरे धीरे गहरे होकर सड़ने लगते हैं । अंत में मछली की मृत्यु हो जाती है ।
उपचार – इसके उपचार में आप एक लीटर सीएफएस प्रति हेक्टेयर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं ।

मछली पालन का बीमा

कब तक होगी मछली बाजार में बिकने को तैयार

जब तक मछलियां तैयार नहीं हो जाती तब तक आपको उनकी पूरी सुरक्षा करनी पडेगी । जब एक वर्ष में आपकी मछलियां एक से डेढ़ किलोग्राम तक की हो जायें तो समझ लीजिए कि आपकी मछलियां बाजार में बेचने लायक तैयार हो गई हैं । ध्यान रहे मछलियां निकालते समय ऐसे जाल का प्रयोग ना करें जिससे कि मछलियां चोटिल हो जायें ।

तो अगर आप भी मछली पालन में रूचि रखते हैं तो ये जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है ।

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