डकवीड की खेती के बारे में पुरी जानकारी

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duckweed

दिनोंदिन बढ़ते प्रचार प्रसार और उपयोग की वजह से अब किसानों का रुझान डकवीड की खेती की तरफ बढ़ रहा है । अब बात आती है इसकी खेती की तो सबसे पहले बात करेंगे

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duckweed डकवीड

Table of Contents

जलवायु

रेगिस्तान और बर्फीले क्षेत्रों को छोड़ दें तो duckweed का पौधा सभी जगहों पर उगाया जा सकता है लेकिन उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जहां तापमान 15 से 35 डिग्री सेंटीग्रेड हो वहां पर ये सबसे अच्छा पनपता है ।

पानी का पीएच

पानी की बात करें तो पानी का पीएच मान 6.5 से 7.5 हो तो तकनीक बहुत तेजी से बढ़ता है । लिटमस पेपर की मदद से पानी का पीएच स्तर पता कर लें और इसके लिए क्या करना है ये भी देखने लिटमस पेपर को पानी में डुबोएं । यदि कागज का रंग लाल हो जाए तो इसका मतलब है कि पानी अगर नीला हो जाए तो समझ लें कि पानी क्षारीय है ।

लेकिन अगर गहरे पीले रंग का या फिर चूने जैसे रंग का हो जाए तो समझ लें कि पानी बिल्कुल आपकी जरूरत के मुताबिक है । अम्लीय पानी को ठीक करने के लिए इसमें खाने का सोडा मिलाया जा सकता है जबकि क्षारीय पानी को ठीक करने के लिए पानी में सिरका या गंधक का तेजाब डालें ।

डकवीड की पौध कहां से मिलेगी ?

किसी भी तालाब से इसके छोटे छोटे पौधे आप इकट्ठे कर सकते हैं । इसके अलावा इसकी पौध आप ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं ।

तालाब से लायी हुई duckweed की पौध को कैसे उपचारित करें ?
यदि आप पौधे तालाब से लेकर के आ रहे हैं तो बेहद जरूरी है कि आप उन्हें उपचारित कर लें और इसे उपचारित करने के लिए लगभग 50 लीटर पानी में एक चम्मच पोटेशियम पर मैगनेट यानि लाल दवा डालकर घोल बना लें । अब इस घोल में तकनीक को 30 सेकेंड के लिए निकालें ।

एक हेक्टेयर के लिए डकवीड duckweed की कितनी पौध की जरूरत होगी ?

एक हेक्टेयर तालाब में लगभग पांच किलो पौधे पर्याप्त रहते हैं । घरों में उगाने के लिए 30 से 36 मीटर गहराई वाली ट्रे में 50 से सौ पौधे भी काफी होते हैं । जैसा कि हमने आपको भी बताया है कि गंभीर प्राकृतिक रूप से गंदे ठहरे हुए और सीवेज के पानी पर अपने आप ही उठ जाती हैं

कैसे की जाती है डकवीड की खेती ?

लेकिन अगर आप इसकी खेती करना चाहते हैं तो यहां हम आपको बता दें कि खुले में तालाब बनाकर तो इसकी खेती कर सकते हैं । इसके अलावा duckweed की संरक्षित खेती भी की जाती है । पहले बात करते हैं संरक्षित खेती की तकनीक को आप लगा सकते हैं । मल्टी लेवल कम्पार्टमेंट बनाकर भी इसकी खेती कर सकते हैं या छोटे टैंक बनाकर इसे वहां पर भी लगाया जा सकता है ।

जैसा कि हमने आपको बताया कि ये मीठे पानी की वनस्पति है तो नदी तालाब या नल जो भी पानी उपलब्ध हो,इसमें डक मीट के पौधे डाल दें । ट्रै को ऐसे स्थान पर रखें जहां हर दिन 10 घंटे की धूप इसे मिल सके लेकिन अगर ऐसा संभव न हो और 10 घंटे की धूप नहीं लग सकती है तो इसके लिए आप फ्लोरोसेंट प्रकाश बल्ब का उपयोग भी कर सकते हैं ।

बल्ब को ट्रै से 15 इंच ऊपर रखें । ट्रै को हर दिन चैक करें और मृत पौधों को हटा दें । सप्ताह में एक बार कुएं का पानी बदल दें । 10 दिन में डकवीड भी निकालने लायक हो जाएंगे तो छोटे जाल या छन्नी आदि की मदद से आप इसे निकालेंगे ।

कहां करे इसका इस्तेमाल ?


आप चाहें तो इस पौधे को अन्य स्थान पर उगाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं । मवेशियों को खिला सकते हैं या फिर अपने भोजन का हिस्सा भी बना सकते हैं । इसे धनिया की पत्ती के स्थान पर सब्जी या दाल में डालें ।

सलाद के रूप में खाएं या इसे आटे में मिलाकर रोटी बना सकते हैं । इसके अलावा भी इससे बहुत से व्यंजन बनाए जा सकते हैं । खुले क्षेत्र में duckweed लगाना चाहते हैं तो देख लें कि आपके आसपास कोई तालाब है या नहीं और यदि आपके पास तालाब पहले से नहीं है तो 3 फीट गहरा गड्ढा बना लें ।

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इसकी लंबाई चौड़ाई अपने हिसाब से रखी जा सकती है । इसकी निचली सतह पर पॉलीथिन बिछा लें या इस तरह की पक्की होदी भी बना सकते हैं । पानी में क्लोरीन हटाने के लिए कोई भी लॉरी मीटर लगाएं । इसके बाद इसमें टंकी के पास डाल दें । 10 से 15 दिन में इसकी उपज तैयार हो जाती है ।

कैसे करें डकवीड की मार्केटिंग ?

अब बात करते हैं इसकी मार्केटिंग की तो तकनीकी खेती भारत में प्रोफेशनल तरीके से नहीं हो रही है । लोग अपने पशु चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं । मछली पोल्ट्री फिशरी में फीड के रूप में दिया जा सकता है ।

आजकल लोग बहुत हेल्थ कॉन्शस हो गए हैं । इसका भोजन के रूप में उपयोग हो रहा है । बाजार में तकनीक पाउडर के रूप में भी उपलब्ध है तो आप ऐसी कंपनियों की तलाश करें जो इसका पाउडर बनाने का काम करती हैं । आप उनको सीधे बेच सकते हैं ।

duckweed की खेती का जो विषय है वो एकदम नया है । ये जानकारी किसानों को नई दिशा देने के मकसद से दी गई है और हमें उम्मीद है कि आपको ये जरूर पसंद आएगा।

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क्या है डकवीड?

डक वीड – ये एक मीठे पानी की वनस्पति है जिसे आपने कई बार अपने आसपास देखा भी होगा जो कि बारिश के ठहरे हुए पानी या तालाबों के ऊपर एक हरे रंग की चादर बिछी होती है । ये बहुत छोटे छोटे पौधों के रूप में दिखाई देती है ।

डकवीड को हिंदी में क्या कहते हैं ?

duckweed को कसपत के नाम से भी जाना जाता है ।

डकवीड कहां पाया जाता है ?

ये लगभग सभी देशों में पाई जाती है सिवाय रेगिस्तानी व बर्फीले क्षेत्रों को छोड़कर ।

डकवीड की क्या खासियत है ?

एक रिपोर्ट में ये पाया गया है कि ये दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली वनस्पति है । पर्यावरणीय स्थिति के हिसाब से 16 से 48 घंटों में ही इसकी बढ़वार दोगुनी हो जाती है । पानी पर इसका फैलाव दिनों दिन घना होता जाता है । ये अधिकतम तापमान को भी आसानी से सह लेती है जबकि न्यूनतम तापमान होने पर भी ये मरती नहीं है बल्कि सुप्तावस्था में चली जाती है और अनुकूल मौसम होते ही वापस फैलने लगती है ।

डकवीड में कौन कौन से पौषक तत्व हैं ?

इसमें अगर पोषक तत्वों की बात करें तो भीड़ में 35 से 45 प्रतिशत प्रोटीन 5 से 15 प्रतिशत रेशा 5 प्रतिशत पॉली अनसैचुरेटेड वसा । इसके अलावा कैल्शियम आयरन विटामिन ए और बी प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं ।

डकवीड का दुसरा नाम क्या है ?

हाई प्रोटीन होने के चलते कुछ क्षेत्रों में डक मीट को वेज मीट बाउल के नाम से भी जाना जाता है ।

duckweed किन् किन् रोगों से बचाता है या किन रोगो से ठीक होने में सहायक है ?

इसमें सुपरफूड वाले सभी गुण मौजूद हैं इसीलिए कुपोषण से लड़ने में भी इसे काफी फायदेमंद बताया जा रहा है । अनेक रिसर्च में यह पाया गया है कि डक मीट शुगर हाई ब्लड प्रेशर को कम करता है । मोटापा घटाने में सहायक है ।

डकवीड का स्वाद कैसा होता है ?

अगर इसके स्वाद की बात करें तो किस्मों के हिसाब से कुछ का स्वाद तो पालक जैसा नमकीन होता है और कुछ का जलकुम्भी जैसा और बहुत सी प्रजातियां ऐसी हैं जिनका कोई स्वाद ही नहीं होता ।

डकवीड का उपयोग कहां कहां होता है?

पशु चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है । बहुत से देशों में इसे बत्तख सुअर मुर्गी मवेशी भेड़ बकरी खरगोश और मछलियों को खिलाया जाता है ।

मछलियों की कुछ प्रजातियां तो ऐसी हैं जो पूरी तरह से इसी पर पाल सकती हैं उन्हें अलग से चारा देने की आवश्यकता ही नहीं है । बत्तख इसे ताजा खाना पसंद करती है । मुर्गी मवेशी भेड़ बकरी व खरगोश आदि को ये ताजी या सुखाकर हरे चारे के रूप में दी जाती है ।

भोजन के रूप में इसका उपयोग किया जाता है । ये थाई बर्मी और बौद्ध लोगों का पारंपरिक भोजन है जबकि अन्य देश भी इसे अब भोजन के रूप में अपना रहे हैं । पालक हरा धनियां या लोटस के स्थान पर लकड़ी का प्रयोग किया जाता है ।

इसे सलाद के रूप में शर्बत बनाकर चावल तथा अन्य व्यंजनों में मिलाकर खाया जाता है । बढ़ती जनसंख्या और घटते खाद्य उत्पादन व पोषण की वजह से दुनिया भर में लगभग सभी देश इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि ये लोगों के भोजन का नियमित हिस्सा बन जाए ।

डकवीड का औघोगिक इस्तेमाल क्या है ?

औद्योगिक इस्तेमाल की अगर बात करें तो अनेक अनुसंधान के बाद इससे बायोफ्यूल बनाने की तकनीक खोज ली गई है और कुछ देशों में इससे ईंधन बनना भी शुरू हो गया है जबकि बायोगैस बनाने में इसका इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है । वाटर प्यूरीफायर यानि पानी को स्वच्छ करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है ।

पानी को साफ करनें में डकवीड कैसे सहायक है ?

डकवीड लगाना पानी को साफ करने का सबसे सस्ता विकल्प है । जैसा कि हमने आपको बताया कि तकनीक की विशेषता है कि ये गंदे ठहरे हुए पानी और सीवेज के पानी पर भी आसानी से उग जाती है और पानी में मौजूद 90 प्रतिशत गंदगी को सोख लेती है । कुछ महीनों तक लगातार पानी में उगने से वो पानी इतना साफ़ हो जाता है कि उसे खेती या मछली पालन में इस्तेमाल किया जा सके । बांग्लादेश में एक हॉस्पिटल है जहां एक योजना के अंतर्गत हॉस्पिटल से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए कई हेक्टेयर खराब पड़ी भूमि पर डकवीड लगाकर पानी को साफ किया जाता है। जब गंदा पानी साफ हो जाता है तो इसे खेती व मछली पालन में इस्तेमाल किया जाता है । फसल को निकालकर मछलियों और मवेशियों को चारे के रूप में दिया जाता है या सुखाकर बेचने से लाभ भी कमा लेते हैं । बांग्लादेश के अलावा भी कई देशों में वॉटर ट्रीटमेंट के लिए इसे इस्तेमाल किया जा रहा है ।

भारत में इसका इस्तेमाल कहां होता है ?

भारत की बात करें तो पंजाब में भी अब तालाबों की सफाई का काम डकवीड लगाकर किया जाएगा । पंजाब सरकार ने इसे अभी प्रयोग के तौर पर लिया है । देखा जाए तो तकनीक बड़े काम की चीज है । इसके बढ़ते उपयोग और मांग के चलते किसानों का रुझान इसकी खेती की तरफ बढ़ रहा है । अब इसे हाइड्रो पानी तकनीक से उगाया जा रहा है और डीबीटी खेती की जाती है।


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