Pure Saffron Farming – शुद्ध केसर की खेती के बारे में पुरी जानकारी

Spread the love
  • 819
    Shares

Advertisement

शुद्ध केसर दुनिया में पाया जाने वाला सबसे महंगा पौधा है | इतना महंगा होने के कारण इसे लाल सोना भी कहा जाता है | केसर की खेती करना बहुत ही आसान और सरल है | केसर की फसल में ज्यादा मेहनत की आवश्कयकता नहीं होती | और साथ ही इसकी फसल अवधि भी 3 – 4 महीने का होता है | केसर की कीमत भी दिन – बदिन बढ़ते जा रहे है | जिससे किसान भाई अच्छा लाभ कमा सकते है

Advertisement
केसर की खेती  saffron farming
केसर की खेती


देश में आज 80% केसर नकली बिक रही है। आप दवाई के रूप में जो प्रयोग कर रहे हैं, हो सकता है कि वह प्लास्टिक का बुरादा हो.. इसलिए बेसक अधिक नहीं मगर अपने लिए शुद्ध केसर उगाएं.. जहां तपती जमीन हो, मौसम गर्म हो, वहां छाया में, गमलों में इसे उगा सकते हैं।

भारत में केसर का मूल्य 2,50,000 से 3,00,000 प्रति किलो तक हो गया है |
केसर की फसल से लगभग 2.5 से 3 किलो सूखी केसर प्रति हेक्टेयर उत्पादन हो सकता है |

केसर का बीज
कीमत- 10 वॉल्व बीज = 550 रू

केसर की खेती के लिए जलवायु / Weather Conditions for Saffron Farming

केसर की खेती मुख्यत: समुंद्र तल से 1500 से 2500 मीटर की उचाई पर होती है। इसके साथ ही इसे ठीकठाक धुप वाले क्षेत्रो में ज्यादा उगाया जाता है | ठंडा एवं गिला मौसम पौधे के विकास को रोकता है | जिससे काफी नुकसान होता है और साथ ही फूल लगने की क्रिया को भी सुस्त कर देता है | गर्म मौसम में काफी अच्छी पराग बनती है |

केसर की खेती के लिए जरूरी मिट्टी / Soil For Saffron farming

केसर के उत्पादन के लिए आपको ध्यान देना होगा की जिस खेत में आप केसर की खेती करने जा रहे है उसकी मिटटी रेतीली, चिकनी, बलुई या फिर दोमट मिट्टी होनी चाहिए | लेकिन केसर की खेती अन्य मिट्टी में भी आसानी से हो जाता है जिस भूमि में पानी का निकास आसानी से हो या किया जा सके | पानी के जमाव के कारण केसर के Corms सड जाते है और फसल बर्बाद हो जाती है इसलिए कोसिस करे की भूमि का चयन करते समय ऐसे भूमि का चयन करे जिसकी मिट्टी में पानी का जमाव नहीं होता हो | अगर भूमि में पानी का जमाव होगा तो फसल काफी हद तक प्रभावित होगी |

केसर की खेती  saffron farming

केसर की खेती के लिए खेत की तैयारी / Preparation of farm for saffron farming

केसर का बीज बोन या लगाने से पहले खेत को अच्छी तरह से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना ले और अंतिम जुताई से पहले 20 टन गोबर का खाद और साथ में 90 किलोग्राम नाइट्रोजन 60 किलोग्राम फास्फोरस और पोटास प्रति हेक्टेयर के दर से अपने खेत में डाल कर अच्छी तरह से जुताई कर ले | इससे आपकी जमीन उर्वरक और भुरभरी बानी रहेगी एवं केसर की फसल काफी हद तक अच्छी होगी |

केसर की खेती करने का उचित समय / Right Time For Saffron farming

किसी भी फसल को रोपने का एक निश्चित या निर्धारित समय होता है | और सही समय पर बीज नहीं रोपने से हमे अपेक्षा के अनुशार उपज नहीं मिल पाती है | इसलिए बीज को हमेशा निर्धारित समय पर ही खेतो पर लगाए |
केसर की फसल लगने का सही समय ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में जुलाई से अगस्त है लेकिन मध्य जुलाई के समय को सर्वश्रेष्ठ होती है | जबकि मैदानी क्षेत्रों में फरवरी से मार्च है।

कैसे करे केसर की खेती की बुआई / How to Sow Saffron in farm

केसर के croms लगाते वक्त ध्यान रखे की croms को लगाने के लिए 6 – 7 cm का गड्ढ़ा करे, और दो corms के बिच की दुरी लगभग 10 cm रखे | इससे croms अच्छे से फलेगी फूलेगी और पराग भी अच्छे मात्रा में निकलेगा |

Also Read This पढे लिखे किसानों को सरकार देगी 20 लाख का लोन। जल्द करें आवेदन

If You Like This information Follow us on

Facebook https://www.facebook.com/khetikare/

Instagram https://www.instagram.com/khetikare/?hl=en

Twitter https://twitter.com/KareKheti

केसर की खेती के लिए सिचाई / Watering of saffron farming

केसर की फसल के लिए 10 से. मि. वर्षा की आवश्य्कता होती है | अगर बीज लगने के कुछ दिन बाद हलकी वर्षा हो तो खेत में सिचाई करने की आवश्कता नहीं है | लेकिन यदि वर्षा नहीं होती है तो हमे 15 दिन के अंतराल में 2 से 3 बार सिचाई करने की आवश्य्कता होती है | सिचाई के दौरान यह ध्यान रहे की खेत में कही भी पानी का जमाव न हो और पानी के जमाओ होने पर निकाशी का जल्द ही प्रबंध करना चाहिए | इससे फसल प्रभावित होने से बचे रहेगी |

केसर की खेती में खरपतवार नियंत्रण / Pestcontrol in saffron farming

खेतो में अक्सर जंगली घास पनपते हुवे नज़र आते है , इसलिए हमे समय समय पर निरीक्षण करते रहना चाइये और जंगली घासों को निकालते रहना चाहिए क्योकि ये हमारे फसल के विकाश में बाधक होते है | केसर के अच्छे विकास के लिए रोजाना 8 घंटे धुप की आवश्य्कता होती है जब केसर अपने विकास के मार्ग पर हो अर्थात corms से पौधे निकल कर बड़ा हो रहा हो उस समय पौधे में हर दूसरे दिन पानी डालने की आवश्यक्ता होती है |

पहाड़ों पर केसर के पौधो में अक्टूबर के पहले सप्ताह पौधों में फूल लगाने की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है | इस समय केसर के पौधो पर उचित ध्यान से और यह खास कर यह ध्यान दे की किसी तरह का कोई कीड़ा या पतंग नहीं लग रहा हो | क्योंकि अगर प्राग नहीं निकला तो उसमे से केसर भी नहीं निकलेगी | जबकि मैदानों में केसर की बिजाई फरवरी और मार्च में करनी होती है। अप्रैल तक यह फसल दे देती है। साधारण सी बात है कि यह फसल 15 डिग्री से 25 डिग्री के तापमान में सही से उपजती है । ऐसे में अपने क्षेत्र में फसल के लिए समय का चुनाव उसी ढंग से करें।

केसर की खेती  saffron farming

केसर की खेती की तुडाई / कटाई / Cuting Of saffron farming

केसर के फूल खिलने के दूसरे दिन ही फूल को तोड़ कर रख लिया जाता है | फूल को सूखने में ज्यादा समय नहीं लगता है यह 3 – 4 घंटे में ही सुख जाते है, फूल के सूखने के बाद फूलो से केसर को निकल लिया जाता है और इसे किसी कंटेनर में रख दिया जाता है और जब पूरी फसल कट जाती है उसके बाद इसे धुप में अच्छे से सूखा कर बाजार में बेचा जाता है |

केसर की खेती के लिए बिक्री बाजार / मंडी / Market for saffron farming

एक बार केसर के पैदावार के बाद इसे अच्छे तरह से Pack कर आप इसे किसी भी नजदीकी मंडी में अच्छे दामों में बेच सकते है | क्योंकि कई किसानो की बड़ी समस्या होती है की इसे कान्हा बेचे तो जानकारी के लिए बताना चाहेंगे की इसे आप नीमच मंडी में बेच सकते है साथ ही आयुर्वेद की मंडी हो वहां भी बेच सकते है इसके साथ ही आप इसे किसी पंसारी की दुकान पर भी बेच सकते हैं

केसर के प्रकार / types Of saffron

  1. नेगिन
    यद्यपि फारसी सर्गोल को प्रीमियम केसर के रूप में माना जाता है, लेकिन सरगोल केसर का एक और रूपांतर है। यदि तीन कलंक धागे एक साथ जुड़े होते हैं और एक क्लस्टर बनाते हैं, तो इस प्रकार के केसर को नेगिन कहा जाता है। चूंकि नेगिन केसर का उत्पादन एक अत्यंत नाजुक और सटीक मैनुअल कौशल है, यह केसर का सबसे महंगा प्रकार है और यह बहुत ही सीमित है। नेगिन की आईएसओ रीडिंग आमतौर पर 270 से अधिक है।
  2. सरगोल (ऑल रेड)
    इस ग्रेड में केवल गहरे लाल रंग के कलंक युक्त युक्तियाँ हैं और अन्य प्रकारों की तुलना में उच्चतम गुणवत्ता है। सरगोल भगवा शुद्ध भगवा है जिसका कोई टूटा हुआ स्टैंड नहीं है और इसमें 260-270 आईएसओ है। उत्तेजनाओं में केसर के सक्रिय घटकों के संचय के कारण, फारसी सरगोल में बहुत मजबूत सुगंध और समृद्ध रंग की क्षमता है।
  3. पुशाल (मंच)
    पुषाल केसर 1-3 मिमी शैली के अंत से जुड़े पौधे का कलंक वाला भाग है। आईएसओ 3632 प्रणाली के अनुसार, यह प्रकार ग्रेड II श्रेणी में आता है, जिसमें 250 तक रंग रीडिंग होती है। हालांकि, पुशाल में सरगोल की शुद्ध बनावट और प्रीमियम गुणवत्ता नहीं है, लेकिन कुछ उपभोक्ता भगवा रंग के आश्वासन के लिए ईरानी पुशाल खरीदना पसंद करते हैं। वैधता और प्रामाणिकता।
  4. खोशे (बंच)
    यह ग्रेड अपेक्षाकृत कम ताकत वाला ग्रेड है (आईएसओ रीडिंग 70 से 75 है) और इसमें लाल कलंकता और पीले रंग की बड़ी मात्रा होती है, जो एक छोटे बंडल में प्रस्तुत की जाती है।
  5. कोनजे (काँग)
    इस ग्रेड में केवल पीली-सफेद शैलियाँ होती हैं और इनमें बहुत कम सुगंध और रंग भरने की क्षमता होती है।
केसर की खेती  saffron farming

What is name of saffron in hindi ?

केसर

Price of Pure Saffron in india ?

2 – 3 Lakhs per kilogram

Right Time For Saffron farming ?

केसर की फसल लगने का सही समय ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में जुलाई से अगस्त है लेकिन मध्य जुलाई के समय को सर्वश्रेष्ठ होती है | जबकि मैदानी क्षेत्रों में फरवरी से मार्च है।


Spread the love
  • 819
    Shares

6 Comments

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *