Farm Bill 2020 तीनों कृषि अध्यादेश किसानों के लिए कैसे नुकशानदायक हैं, जरूर पढे़ं

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Farm Bill 2020 केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि अध्यादेश किस प्रकार से किसानों के लिए नुकसानदेह साबित होंगे

अभी मोदी सरकार ने तीन कृषि अध्यादेश जारी किए हैं वह इस प्रकार से हैं-
(1) Farmer’s produce Trade and commerce Ordinance
(2) Essential Commodity Act 1955
(3) The Farmers Agreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance
इस पोस्ट में मैं केवल पहले अध्यादेश पर अपनी बात रखुंगा।
क्योंकि तीनों अध्यादेशों पर एक साथ लिखने से पोस्ट बहुत बड़ी हो जाऐगी, जिससे आप अच्छे से पढ नहीं पाऐंगे।

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Contract Farming से जुडे विवाद में कार्ट नहीं जा सकेंगे किसान

पहला कृषि अध्यादेश▶️ Farmer’s Produce Trade and commerce Ordinance इस अध्यादेश के तहत केंद्र सरकार एक देश एक कृषि मार्केट बनाने की बात कह रही है इस अध्यादेश के तहत कोई भी पैन कार्ड धारक व्यक्ति,कम्पनी, सुपर मार्केट व अन्य जो भी धन्नासेठ जो फसल खरीदने का धंधा करना चाहते हैं वह बिना किसी रोक टोक के कहीं भी किसी भी स्थान पर फसली व्यापार कर सकते हैं कृषि मंडी के जो भी नियम थे उन सबसे इन्हें इन अध्यादेशों के तहत मुक्त कर दिया गया है यह सभी गतिविधियां APMC यार्ड (Agricultural Produce Market committee) से बाहर होंगी।

Farm Bill 2020
Farm Bill 2020


यानि कि इस खरीदारी में किसानों को मिनिमम सुपोर्ट प्राइसेज पर फसलों के भाव नहीं मिलेंगे क्योंकि MSP व्यवस्था सिर्फ़ मंडीयो तक ही सिमित है यदि किसान मंडी से बाहर किसी व्यक्ति या सुपर मार्केट को अपनी फसल बेचता है तो उसका भाव वह बाहरी व्यक्ति तय करता है ना कि किसान या सरकार। Farm Bill 2020
इस प्रकार से यहाँ किसानों की मिनिमम सुपोर्ट प्राइसेज के तहत फसल खरीदने की प्रक्रिया धीरे धीरे समाप्त हो जाऐगी,जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। Farm Bill 2020

दूसरी बात यदि इस अध्यादेश के तहत किसी पैन कार्ड धारक संस्था को किसान फसल बेचता है तो उस संस्था को तीन दिन में किसान के माल की किमत चुकानी होगी।
यदि खरीददार और किसान के बिच किमत को लेकर कोई विवाद होता है तो उसके समाधान के लिए किसान SDM से सिकायत करेगा।
एसडीएम इसके समाधान के लिए एक कमेटी गठित करेगा,जिसके समाधान करने का समय तीस दिन का होगा। Farm Bill 2020


जिसमें किसान एंव संबंधित कंपनी अधिकारी होंगे जो 30 दिन में आपसी तालमेल के तहत मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे।
यदि यहाँ समाधान नहीं होता है तो इस मामले की सुनवाई एसडीएम द्वारा की जाऐगी, और यदि इसमें एस डी एम भी समाधान करने में नाकाम होता है तो समाधान एसडीएम व जिला अधिकारी के माध्यम से होगा।


इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा और कितना किसान को आर्थिक नुकसान होगा इन सबके बारे में आप ऊपर की बातों से अंदाजा लगा सकते हैं
इसमे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस अध्यादेश के तहत किसान को कोर्ट जाने का कोई अधिकार नहीं होगा।
मतलब कि न्याय का काम एसडीएम,जिला अधिकारी व कंपनी अधिकारियों के माध्यम से ही होगा। Farm Bill 2020

तमाम बातों को देखते हुए हम अंदाजा लगा सकते हैं कि यह अध्यादेश किसानों के नुकसान के सिवाय किसी काम का नहीं है इससे मंडी व्यवस्था खत्म होगी, किसानों को फसल बेचने के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ेगीं।
एक विदेश में पढने वाला डिग्रीधारी व्यक्ति भी आप की फसलों में नमी व कम पकी हुई बताकर कम किमत में फसल खरीदने का काम करेगा।
जिन व्यक्तीयों को खरीफ और रबी की फसलों में अंतर का पता न हो, ऐसे ऐसे व्यक्ति आप की फसलों के दाम तय करेंगे।

कृषि वैज्ञानिक विरेंद्र सिंह लाठर के अनुसार यह अध्यादेश अमेरिका में दशकों पहले लागू किए गए थे लेकिन इससे किसानों को लाभ मिलने की बजाय आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि मोदी सरकार का पहला कृषि अध्यादेश किसानों की कमर तोड़ने वाला है किसान पुत्रों को कृषि कार्यों से हटने के लिए मजबूर करने वाला है।
इन सभी तथ्यों के आधार पर खेतीकरें.काम की टीम इन किसान विरोधी अध्यादेशों का पूर्णतः विरोध करती है।

Courtesy/Credit – कृषि वैज्ञानिक विरेंद्र सिंह लाठर

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