Honey Mission 2020 – मधुमक्खी पालन बनाएगा आपको आत्मनिर्भर। होगी लाखों में कमाई

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Honey Mission आज हम बात करने जा रहे हैं मधुमक्खी पालन के बारे में। मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे किसान कम लागत में शुरू कर सकते हैं लेकिन इससे भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं । मधुमक्खी पालन से शहद, प्रोपल्सन रॉयल जेली जैसे कई सारे उत्पाद किसानों को प्राप्त होते हैं जिनकी अच्छी खासी बाजार मांग रहती है । इसके साथ ही किसानों के लिए अच्छा मुनाफा कमाने का रास्ता भी खुल जाता है ।

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वहीं खेती किसानी के साथ साथ मधुमक्खी पालन किया जाए तो फसलों में भी उत्पादकता में बढ़ोतरी होती है । ये ऐसा व्यवसाय है जो इंसानों को कई तरह से लाभ ही लाभ है । विस्तार से जानते हैं मधुमक्खी पालन के बारे में । मधुमक्खी पालन को कृषि का ही एक अंग माना जाता है । इसके द्वारा कृषि को भी लाभ पहुंचता है और फसलों की पैदावार भी बढ़ती है । मधुमक्खी पालन अथवा शहद उत्पादन की गिनती कम लागत पर अधिक लाभ देने वाले व्यवसायों में की जाती है । यह किसानों को खेती के साथ ही आय का एक अन्य लाभकारी स्रोत भी उपलब्ध कराता है ।

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शहद को प्राकृतिक मिठास का सबसे उत्तम स्रोत माना जाता है और औषधीय गुणों में भरपूर होने के कारण इसे एक प्राकृतिक औषधि के रूप में भी उपयोग किया जाता है । स्वास्थ्य के प्रति जागरूक अधिकांश लोग खाद्य पदार्थों में मिठास लाने के लिए चीनी की जगह शहद का ही प्रयोग करते हैं । भारत सरकार के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं ।

Honey Mission
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इन योजनाओं के अंतर्गत शहद प्रसंस्करण संयंत्र लगाने के लिए उद्यमी को शुरूआत में 65 प्रतिशत तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है । साथ ही 25 प्रतिशत तक सब्सिडी के रूप में अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी मिलती है । खादी ग्राम उद्योग आयोग की वेबसाइट पर आप हनी मिशन के अंतर्गत मधुमक्खी पालन व्यवसाय एवं सरकारी योजनाओं संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।

शहद की तेजी से बढ़ती मांग और मधुमक्खी पालन से किसानों को मिलने वाले लाभ को देखते हुए देश में शहद उत्पादन को कई गुना बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास जारी हैं । इसके लिए विभिन्न राज्यों में बड़े स्तर पर योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनमें इस क्षेत्र से संबंध किसानों और उद्यमियों के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण उद्योग संबंधी जानकारी और आर्थिक सहायता भी शामिल है ।

Honey Mission योजना खादी ग्रामोद्योग विभाग की योजना है । इसके जरिये किसान और पैसा कमाने की चाह रखने वाले लोग रोजगार शुरू कर मोटी कमाई कर सकते हैं । लोग Honey Mission के तहत मधुमक्खी पालन कर कमाई कर सकते हैं । अब ऐसी तकनीक आ रही है जिसके माध्यम से शहद निकालते समय मधुमक्खियां नहीं मरती । मुंह और कोलन भी बनता है । Honey Mission से न केवल किसान बल्कि बेरोजगार युवक भी बिजनस के तौर पर देख रहे हैं ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2017 में Honey Mission का शुभारंभ किया था । प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2016 में हनी मिशन के शुभारंभ के अवसर पर गुजरात के बनासकांठा जिले के बीमा में शुरू की गई बनाम Honey Mission परियोजना के तर्ज पर मीठी क्रांति का आह्वान किया था । Honey Mission के तहत खादी और ग्रामोद्योग आयोग मधुमक्खी पालकों को बक्से प्रदान करने के साथ साथ प्रशिक्षण भी प्रदान करता है ।

खादी और ग्रामोद्योग विभाग ने मिशन पहल के अंतर्गत मधुमक्खी पालन उद्योग इकाई स्थापित करने के लिए अनुदान प्रदान करता है । ये विभाग 10 बक्सों की इकाई शुरू करने पर 80 प्रतिशत अनुदान प्रदान करता है । साथ ही अभी तक 246 मेट्रिक टन शहद का उत्पादन किया गया है ।

6 मई 2019 को खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने Honey Mission पहल के दौरान दो वर्ष से भी कम समय में देश के किसानों और बेरोजगार युवकों को मधुमक्खी पालन हेतु एक लाख से अधिक बक्से वितरित किए । खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अनुसार भारत में पहली बार अभी तक मधुमक्खी पालन हेतु एक लाख एक हजार बक्से वितरित किए गए हैं । भारतीय बाजार में शहद की मजबूत व्यावसायिक स्थिति के बारे में बात की जाए तो यहां ब्रांडेड और अन ब्रैंडेड दोनों प्रकार के शहद का संयुक्त रूप से लगभग दो हजार करोड़ का सालाना व्यापार है ।

इसमें ब्रांडेड शहद की हिस्सेदारी तकरीबन 700 से 800 करोड़ है । देश में हर साल लगभग 700 करोड़ टन प्राकृतिक शहद का उत्पादन किया जाता है जिसमें लगभग 50 प्रतिशत शहद का सालाना निर्यात होता है । भारत में मधुमक्खी पालन प्रायः पहाड़ी क्षेत्रों में किया जाता रहा लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसे व्यवसाय में बढ़ते लाभ की वजह से देश के मैदानी क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर मधुमक्खी पालन किया जाने लगा है ।

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