Kathal Ki Kheti कटहल की खेती की पुरी जानकारी

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Kathal ki kheti kaise karen – कटहल यानी जैक फ्रूट (Jack Fruit) । पेड़ पर होने वाले फलों में कटहल दुनिया का सबसे बड़ा फल माना गया है । बड़े बुजुर्गों ने कहा है कि इसे उगाने वाला कभी गरीबी नहीं देखता और यह कहावत आज के समय में सौ फीसदी सही साबित हो रही है क्योंकि देश के अलग अलग हिस्सों में अन्य फसलों के मुकाबले किसान कटहल की खेती से अच्छी आमदनी ले रहे हैं ।

कटहल का परिचय / Introduction of Jack Fruit / kathal ki kheti in hindi

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बात जहां तक Jack Fruit के गुणों की तो दोस्तो भारत में सब्जी के रूप में पसंद किए जाने वाले कटहल में प्रोटीन आयरन कार्बोहाइड्रेट विटामिन ए सी पोटेशियम कैल्शियम और जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है । वहीं बतौर फसल ये किसान के लिए भी बेहद लाभकारी है । हां देश में कटहल की खेती असम में सबसे ज्यादा होती है । इसके बाद देश के अलग अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के राज्यों में इसकी बागवानी बड़े पैमाने पर की जाती है । अगर आप भी कटहल की खेती करने के इच्छुक हैं तो चलिए आपको कटहल की खेती से जुड़ी जमीनी बातें बताते हैं।

Kathal ki kheti kaise karen / Jack Fruit Farming

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कटहल की खेती के लिए जरूरी जलवायु

कटहल की खेती के लिए गर्म व आद्र जलवायु अच्छी मानी जाती है जहां ज्यादा बरसात होती है और मौसम भी गर्म रहता है । ऐसे क्षेत्र में कटहल की खेती अच्छी फल फूल पाती है । गर्म और नम जलवायु में कटहल की बढ़वार भी अच्छी होती है यानि शुष्क और शीतोष्ण दोनों तरह की जलवायु कटहल के लिए उत्तम है । पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों में भी कटहल की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है ।

कटहल की खेती के लिए मिट्टी का चुनाव

अब बात करें मिट्टी की तो कटहल की खेती सभी तरह की मिट्टी में संभव है लेकिन जीवांश युक्त गहरी दोमट मिट्टी इसके लिए उत्तम मानी गई है क्योंकि कटहल की जड़ें काफी गहरी जाती हैं । हां जल निकासी की उचित होना बेहद जरूरी है क्योंकि जल भराव की स्थिति में इसके पौधे मरने की आशंका रहती है । भूमि का पीएच मान सात से साढ़े सात के बीच होना चाहिए।

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कटहल की किस्में / Variety Of Jack Fruit

बात करें किस्मों की तो कटहल में खासतौर पर दो तरह की प्रजातियां होती हैं ।
कठोर और नरम गुदे वाली
कठोर गूदे वाले किस्म के फल का आकार बड़ा होता है । इसका गूदा कठोर और बीज कम होते हैं । नरम गुदे वाली जातियों में फल का आकार छोटा होता है । गूदा नरम और बीज बड़े होते हैं । वहीं छोटे गुदे वाली जातियों में फल छोटा होता है और गूदा ज्यादा होता है । इसके अलावा भी कटहल की कुछ किस्में स्थानीय हैं जैसे चंपा खाजा गुलाबी सिंगापुरी बथुआ हरी यामाहा और रुद्राक्ष।

कटहल की खेती के लिए बीज / Kathal ki kheti ke liye beej

दोस्तो कटहल की खेती के लिए बीज पके हुए कटहल से ही प्राप्त होते हैं । बीज पौधे तैयार करने के लिए पके फल से बीज निकालकर तुरंत बुआई कर देनी चाहिए । kathal ki kheti in hindi

कटहल की खेती में बुआई का सही समय / Right time for sowing Jack Fruit

बुआई के लिए जून जुलाई का महीना ठीक रहता है या आप चाहें तो किसी विश्वसनीय नर्सरी से पौध खरीद कर रोपाई कर सकते हैं । पौध रोपाई के लिए जुलाई या अगस्त का महीना अच्छा माना गया है ।

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कटहल की खेती में पहला फल / Kathal ki kheti me pehla fal

kathal ki kheti in hindi बीजू पौधे जहां 8 से 10 साल में फल देना शुरू करते हैं वहीं पौध तैयार हुए वृक्ष 5 से 6 साल में फल देने लायक हो जाते हैं ।

कटहल की खेती में रोपाई और Kathal ki kheti me खाद

रोपाई किस प्रकार करें, ये भी जानें । सबसे पहले खेत को तैयार करें । गहरी जुताई करके पाटा लगाकर भूमि को समतल कर लें । फिर 10 से 12 मीटर की दूरी पर एक मीटर की गोलाई और एक मीटर की गहराई वाले गड्ढे तैयार करें । इन गड्ढों में 20 से 25 किलोग्राम गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट 250 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट 500 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश एक किलोग्राम नीम की खली और 10 ग्राम माथे को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर गड्ढों में भर दें । kathal ki kheti in hindi

पौध लगाकर हल्की सिंचाई करें । ये मात्रा हर तीन साल तक देते रहें । इसके बाद 3 से 7 साल के बीच उर्वरकों की मात्रा को दोगुना कर दें । 7 साल के बाद प्रति पौधा नाइट्रोजन 600 ग्राम फास्फोरस 300 ग्राम और पोटाश कर दें । 240 ग्राम । ध्यान रहे हर वर्ष पहली खुराक सितंबर से अक्तूबर और दूसरी जनवरी से फरवरी में ।

कटहल की खेती में सिंचाई / Irrigation in jack fruit farming

जहां तक बात है सिंचाई की तो सर्दी में 15 15 दिन के अंतराल पर और गर्मियों में 7 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें । बस ध्यान ये रहे कि जड़ के पास पानी न भरें क्योंकि इससे पौधे मर सकते हैं । पूर्ण विकसित पेड़ों को सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं होती क्योंकि वे जमीन से खुद ही पानी खींच लेते हैं ।

कटहल की खेती में रोग / Kathal ki kheti me rog

समय समय पर पौधों की कटाई छंटाई करते रहें । कटहल के पौधों में कई प्रकार के रोग और कीटों का खतरा रहता है तो रोग या कीटों की समस्या होने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर उपचार करें ।

kathal ki kheti kaise karen Jack fruit
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कटहल की खेती के साथ मिश्रित कृषि / Mixed Farming with Kathal aka Jack fruit

कटहल के साथ आप चाहें तो ओर फसल भी ले सकते हैं क्योंकि पौधे से पौधे के बीच काफी दूरी होती है और इसमें फल भी देर से लगता है तो इस जमीन पर आप सब्जियां या दलहनी फसलें लगाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं । kathal ki kheti in hindi

कटहल की खेती में पैदावार / Production in jack fruit farming / kathal ki kheti

अब बात करें पैदावार की तो जैसा हमने आपसे कहा कि बीजों पौधों की अपेक्षा कलम से तैयार पेड़ दो से तीन साल पहले फल देने लग जाते हैं । हां प्रति पेड़ शुरुआत में दस से बीस फल लगते हैं जो धीरे धीरे 250 से 400 फल तक हो जाते हैं ।
कटहल के पेड़ की एक खास बात ये है कि ये फल जड़ से लेकर तनों और शाखाओं तक लगता है । इस तरह हमें प्रति पेड़ क्विंटलों के हिसाब से फल मिलते हैं और देखरेख में ज्यादा नहीं होती । इस तरह आप थोड़ी देखरेख में एक लाख सालों साल मुनाफा ले सकते हैं ।

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Jack fruit in hindi

कटहल

India me kathal ki kheti ( Jack Fruit ) kon kon se state me hoti h ?

देश में कटहल की खेती असम में सबसे ज्यादा होती है । इसके बाद देश के अलग अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के राज्यों में इसकी बागवानी बड़े पैमाने पर की जाती है


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